रघुवंशम् (मल्लिनाथ संजीवनी व श्रीकृष्णमणि त्रिपाठी हिन्दी व्याख्या)
Raghuvamsham of Kalidasa Hindi
महाकवि कालिदास द्वारा
स्रोत: Raghuvamsham with Mallinatha Sanjivani & Hindi Commentary by Dr. Shrikrishnamani Tripathi (उद्गम)
पृष्ठ 15, कुल 735 में से
संदर्भ में पढ़ें( ८ )
नामधारी दूसरे व्यक्तियों की कृतियों को इनके नाम से जोड़ देने के सम्बन्ध में काफी विवाद रहा है, किन्तु इधर आधुनिक विद्वानों की खोजों के आधार पर प्रमुख रूप से कालिदास की निम्नाङ्कित कृतियाँ मानी जाती हैं—दो महाकाव्य—( १ ) रघुवंश, ( २ ) कुमारसम्भव । तीन नाटक—( क ) अभिज्ञानशाकुन्तल, ( ख ) विक्रमोर्वशीय, ( ग ) मालविकाग्निमित्र । एक खण्ड काव्य—मेघदूत तथा एक मुक्तककाव्य—ऋतुसंहार । शृङ्गारतिलक के इनके कृतित्व में समीक्षकों को सन्देह है ।
रघुवंश की विशेषता
रघुवंश में महाकाव्य के सभी लक्षण घटते हैं । इसके १९ सर्गों में कवि कालिदास ने इक्ष्वाकुवंशी महाप्रतापी राजा दिलीप से लेकर अग्निवर्ण तक २७ राजाओं का आदर्शमय वर्णन किया है । यद्यपि इस काव्य की कथा वाल्मीकिरामायण, महाभारत तथा पद्म आदि पुराणों में पायी जाती है, पर वाल्मीकि से अधिक समता है, फिर भी वाल्मीकिरामायण और रघुवंश के वंशक्रम में महान् अन्तर है । वा० रा० आदि काण्ड, सर्ग ७० के १९-४३ श्लोकों के अनुसार दिलीप से राम तक १८ राजाओं का नाम निर्दिष्ट है; किन्तु रघुवंश में दिलीप से राम तक ५ ही पीढ़ी पड़ती है ( १ ) दिलीप, ( २ ) रघु, ( ३ ) अज, ( ४ ) दशरथ और ( ५ ) राम ।
रघुवंश महाकाव्य की संस्कृत व्याख्याओं में मल्लिनाथ की सञ्जीवनी व्याख्या सर्वोत्कृष्ट तथा प्रामाणिक मानी जाती है । अतः इस संस्करण में सञ्जीवनी व्याख्या भी दी गई है और परीक्षार्थी छात्रों की सुविधा के लिए अन्वय, संस्कृत में व्याख्या, समास, भावार्थ तथा हिन्दी में भावार्थ भी दे दिया गया है जिससे यह ग्रन्थ और भी सुबोध एवं उपादेय हो गया है । आशा है, छात्रवर्ग व्याख्याकार तथा प्रकाशक के प्रयास को अवश्य सफल बनायेगा । इति शम् ।
विजयादशमी }
सं० २०३२ }
वशांवद
श्रीकृष्णमणि त्रिपाठी