भारतकोश
रघुवंशम् (मल्लिनाथ संजीवनी व श्रीकृष्णमणि त्रिपाठी हिन्दी व्याख्या)

रघुवंशम् (मल्लिनाथ संजीवनी व श्रीकृष्णमणि त्रिपाठी हिन्दी व्याख्या)

Raghuvamsham of Kalidasa Hindi

महाकवि कालिदास द्वारा

स्रोत: Raghuvamsham with Mallinatha Sanjivani & Hindi Commentary by Dr. Shrikrishnamani Tripathi (उद्गम)

DevanagariHindipublished735 पृष्ठ

पृष्ठ 44, कुल 735 में से

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कुमारों को देखकर अत्यन्त मगन हो गये। विश्वामित्रजी ने कहा—राजन् ! ये राजकुमार धनुष देखना चाहते हैं। इसपर उन्हें बड़ा विषाद हुआ ओर अपनी प्रतिज्ञा पर पश्चात्ताप होने लगा। उन्होंने सोचा कि ऐसे राजकुमारों के रहते धनुषयज्ञ का अड़ङ्गा क्यों लगाया। जब इस धनुष को उठाने में बड़े-बड़े राजा मुँहकी खाकर चले गये तों ये बालक उसे कैसे उठा सकते हैं ? यह सुनकर मुनि बोले—राजन् ! इनकी शक्ति मैं जानता हूँ, कहने से क्या होता है ? जैसे वज्र की परीक्षा पहाड़ पर होती है वैसे ही इनकी शक्ति की परीक्षा उस धनुष पर होगी। छोटे मन्त्र या आग की चिनगारी में बड़ी शक्ति छिपी रहती है। बाद जाकर राम ने सबके देखते-देखते शङ्करजी के धनुष को उठाकर उसकी डोरी इतनी तान दी कि उससे भयङ्कर शब्द हुआ। बाद सीताजी ने राम के गले में जयमाला डाल दी। अनन्तर जनकजी ने राजा दशरथजी के पास सन्देश भेजकर बरात लाकर विवाह करने की प्रार्थना की। तदनुसार दशरथ बड़े उत्साह से बरात लेकर जनकपुर पधारे। दोनों प्रतापी राजाओं ने मिलकर शास्त्रविधि से चारों भाइयों का विवाह कर दिया। बरात लौटते समय परशुराम से मार्ग में भेंट हुई ओर वे राम को अपना परशु देकर तपस्या करने चले गये और राजा दशरथ पुत्र तथा पुत्रवधुओं के साथ अयोध्या पहुँचे। वधुओं को देखने के लिए स्त्रियाँ उत्सुक थीं।

द्वादश सर्ग

राजा दशरथ ने संसार के सब सुख भोग लिये और वृद्ध हो चले। उन्होंने अपने ज्येष्ठ पुत्र राम को राज्याभिषेक करने का विचार किया जिसे सुनकर अयोध्यावासी फूले नहीं समाये। पर निष्ठुर कैकेयी ने ऐसा चक्र चलाया कि राम को वनवास जाना पड़ा। देवासुर संग्राम के समय उनके प्राण की रक्षा के बदले दो वर धरोहर के रूप में रख छोड़ा था। कैकेयी ने एक वर तो यह मांगा कि चौदह वर्ष के लिए राम वन चले जायें और दूसरा यह कि मेरे पुत्र को राज्य मिले। यह सुनकर लोगों के आश्चर्य का ठिकाना न रहा। राम का मुखभाव जैसा राज्याभिषेक के समय था ठीक वैसे ही वन जाने के समय भी था। अपने पिता के वचन को सत्य करने के लिए वे सीता और लक्ष्मण के साथ दण्डक वन में चले गये। इधर राम के वियोग में राजा दशरथ ने अ-

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