भारतकोश
रघुवंशम् (मल्लिनाथ संजीवनी व श्रीकृष्णमणि त्रिपाठी हिन्दी व्याख्या)

रघुवंशम् (मल्लिनाथ संजीवनी व श्रीकृष्णमणि त्रिपाठी हिन्दी व्याख्या)

Raghuvamsham of Kalidasa Hindi

महाकवि कालिदास द्वारा

स्रोत: Raghuvamsham with Mallinatha Sanjivani & Hindi Commentary by Dr. Shrikrishnamani Tripathi (उद्गम)

DevanagariHindipublished735 पृष्ठ

पृष्ठ 45, कुल 735 में से

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प्राण छोड़ दिये। कुल मन्त्रियों ने दूत भेजकर ननिहाल से भरत को बुलाया। जब भरतजी को अपने पिता की मृत्यु तथा रामके वनवास का समाचार मालूम हुआ तब वे केवल अपनी मां से ही नहीं बल्कि अयोध्या की राजलक्ष्मी से भी चिढ़ गये और साथ में सेना लेकर राम को ढूँढ़ने निकल पड़े।

जब आश्रमवासियों ने उन्हें वे वृक्ष दिखाये जिनके नीचे निवास कर राम आगे बढ़े थे तो उनकी आँखों में आँसू छलक आये। उन दिनों राम चित्रकूट के वन में निवास करते थे। वहाँ जाकर भरतजी ने उन्हें पिता की मृत्यु का समाचार सुनाया और कहा कि आप चलकर अयोध्या का राज्य संभालें, किन्तु राम अपने स्वर्गीय पिता की आज्ञा से तनिक भी न डिगे। अन्त में भरत की प्रार्थना पर उन्हें अपनी खड़ाऊँ दे दी। उसे लेकर भरतजी ने लौटकर नन्दीग्राम में ही डेरा डाल दिया और वहीं से अयोध्या के राज्य की रक्षा करते रहे। इस प्रकार अपने बड़े भाई राम में भक्ति करके राजपद को ठुकराकर मानो भरतजी ने अपनी मां के पाप का प्रायश्चित्त कर डाला। इधर राम भी सीता और लक्ष्मण के साथ कन्द-मूल-फल खाते हुए व्रतपालन करने लगे। एक बार इन्द्रपुत्र जयन्त ने सीता के पैर में चोंच मारा, जिसके परिणामस्वरूप उसकी एक आँख गायब हो गयी। बाद अत्रि मुनि के आश्रम पर पहुँचने के बाद सीताजी को अनसूयाजी ने पातिव्रत्य धर्म का सुन्दर उपदेश दिया। बाद वे जब पञ्चवटी में गये तब रावण की बहिन शूर्पणखा सुन्दर रूप बनाकर राम के पास आ पहुँची और सीताजी के सामने ही राम को अपना पति बनाने का प्रस्ताव रखा तो राम ने कहा—मेरा विवाह तो हो चुका है, तुम मेरे छोटे भाई के पास जाओ। वह झट लक्ष्मण के पास पहुँची और सीता को डरवाने लगी। तब झट लक्ष्मण ने उसके नाक-कान काटकर उसे कुरूप बना दिया। वहाँ से चलकर वह नकटी जनस्थान जाकर खर, दूषण, त्रिशिरा आदि को उभाड़ी। राम ने अपने बाणों से सबको मार गिराया। तब शूर्पणखा रावण के पास जाकर रोने लगी। बहिन के अपमान से उसने मारीच को मायामृग बनाकर लक्ष्मण को धोखा देकर सीता को चुराकर लङ्का ले गया। मार्ग में गृद्धराज जटायु उससे लड़कर मारा गया। उसने बताया कि रावण सीता को चुरा ले गया है। उसका दाह-संस्कार कर आगे बढ़े तो हनुमान् के माध्यम से सुग्रीव से भेंट हो गयी। उसके भाई बालि को मारकर उससे मित्रता कर उनके सहयोग से वानरी सेना इकट्ठा कर लङ्का पर चढ़ाई कर दी। रावण को रथ पर और

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