राजतरंगिणी (महाकवि कल्हण - सम्पूर्ण काश्मीर व भारत राजवंश इतिहास)
Rajatarangini of Kalhana with Hindi Translation
महाकवि कल्हण / पं. रघुनाथ सिंह द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंप्रथम तरङ्ग ३५ सेमेटिक जाति या ट्राइब थी। उस जाति ने 'कश' नगर बसाया। यह नगर बुखारा में है। उसे अब 'शहर-ए-सब्ज' कहते हैं। वह दक्षिण, पश्चिम और पूर्व दिशाओं में पर्वत से घिरा है। वह शहर सातवीं शताब्दी में आबाद हुआ था। यहीं से काश्मीर में सेमेटिक लोग आये। यहूदियों का काश्मीर में आबाद होना सिद्ध होता है। हिन्दूराज काल में काश्मीर में कोई बाहरी आबाद नहीं हो सकता था। यहूदी इसके अपवाद थे। यहूदी सेमेटिक अर्थात् शामी जात है। अतएव अनुमान लगाया गया है कि इसका नाम 'कश' के आधार पर कश्मीर पड़ गया। उक्त वर्ग के लेखकों ने एक और अनुमान लगाया है। 'काशान' या 'काशगर' शब्द का अपभ्रंश कश्मीर हो गया। 'काशान' इराक में शहर है। तेहरान से १५० मील तथा इस्फ़हान से ९० मील ईशान दिशा में पड़ता है। देश भर में सबसे अधिक यहाँ गरमी पड़ती है। 'काशगर' चीनी तुर्किस्तान में उसकी पश्चिमी सीमान्त पर शहर है। काश्मीर के रहने वाले मुसल- मान काश्मीर को 'कशीर' कहते हैं। स्थानीय मुस- लिम जनता कश्मीर को 'कसीर' कहती है। इसलिए कश्मीर शब्द को 'काशगर' 'काशान' तथा 'कश' नगरों से जोड़ने का प्रयास किया गया है। श्रीनगर के स्थान पर कश्मीर शब्द श्रीनगर के लिए मुस्लिम काल में प्रयुक्त होता रहा है। सिखों के काश्मीर में आधिपत्य स्थापित हो जाने पर श्रीनगर और कश्मीर समानार्थक माने जाते थे। उक्त तीनों शहर हैं। श्रीनगर को कश्मीर कहा जाता था। अतएव 'कशीर' शब्द ही कश्मीर शब्द का मूल है। श्री स्तीन ने कश्मीर शब्द का अपभ्रंश 'कशीर' शब्द को माना है। उर्दू तथा फारसी में 'ब्राह्मण' शब्द को 'बरहमन' अबतक लिखते हैं। इसी प्रकार 'कश्मीर' को अगर उर्दू तथा फारसी के लेखक 'कशीर' लिखने लगे हों तो कोई आश्चर्य की बात नहीं मानी जा सकती है जिस प्रकार मुसलमान होने पर पुराना नाम बद- लकर मुस्लिम नाम रख दिया जाता है। उसी प्रकार काश्मीर मुस्लिम बहुल आबादी तथा मुस्लिम राज होने के कारण 'कश्मीर' के स्थान पर उसे 'कशीर' और काश्मीरी भाषा को 'कौशुर' कहा जाने लगा। इसी प्रकार १४ वीं शताब्दी में शाह हमदान ने जो काश्मीर उपत्यका के रक्षक सन्त मुसलमानों द्वारा माने जाते हैं। काश्मीर का नाम 'बाग-ए- सुलेमान' रख दिया था। शंकराचार्य पर्वत का नाम भी बदलकर 'तख्त-ए-सुलेमान' रखा गया। 'अनन्त' नाग शहर का नाम इस्लामाबाद पड़ा। यद्यपि आज भी अनन्त नाग एक जिला है। 'कश्मीर' या 'काश्मीर' शब्द महाभारत, पुराणादि सभी ग्रन्थों में मिलते हैं। उनका अस्तित्व आज से ४ या ५ हजार वर्ष पूर्व था। उस समय 'बाइबिल' जिसमें 'हजरत सुलेमान' का नाम आता है का अस्तित्व ही नहीं था। मुस्लिम काल का इतिहास चौदह सदी से अधिक तथा बाइबिल काल ईसा पूर्व २ हजार वर्ष से ऊपर नहीं जाता। कश्मीर शब्द प्राचीन शब्द है। यही प्रचलित है। निश्चयात्मक रूप से 'कश्यप' से इस शब्द को जोड़ना उचित प्रतीत होता है। · कम से कम २ हजार वर्षों से इतिहास इस बात का साक्षी है कि 'काश्मीर' शब्द सर्वदा प्रयुक्त होता रहा है। पतंजलि ने काश्मीर शब्द का उल्लेख किया है। उसके पश्चात् पाणिनि ने काश्मीर शब्द का उल्लेख किया है। प्लोतमी (सन् १५० ई०) यूरोपियन लेखक ने काश्मीर का नाम 'कस्र्पीरा' दिया है। वराहमिहिर (५वीं शताब्दी) के वृहद् संहिता में काश्मीर का उल्लेख किया है। हुयेन सांग (स० ५४१ ई०) चीनी पर्यटक ने काश्मीर को 'किया शि मिलो' लिखा है। रत्नावली नाटक (७ वी सदी) ('काश्मीरदेशजे क्षेत्रे कुमकुमम् पद्मवेदितन्-)' 'काश्मीर' शब्द का स्पष्ट उल्लेख है।