राजतरंगिणी (महाकवि कल्हण - सम्पूर्ण काश्मीर व भारत राजवंश इतिहास)
Rajatarangini of Kalhana with Hindi Translation
महाकवि कल्हण / पं. रघुनाथ सिंह द्वारा
पृष्ठ 203, कुल 984 में से
संदर्भ में पढ़ें१२० राजतरंगिणी तवज्जो और इनायत से हासिल हो गये। ये सारीख भोज के पत्तों पर लिखी हुई थीं। मुतालह करने से पैंतीस राजाओं के नाम जो सन् कलयुग शुरू होने से कवल कश्मीर मे हुए थे और जिन्हे कल्हन पण्डित ने ब वजह अदम बसूक तर्क कर दिया था मालूम हुए। बादशाही हुक्म के मुताबिक इस किताब का तरजुमा भी किया गया और बतौर जमीया अपनी किताब के आखिर मे मिलाकर दोस्त अहबाब के लिये सामाने मुसर्रत बनाने की कोशिश की।' हसन कहता है—'राकुमउल हुरुफ़ ने मुस- न्निफ 'वाकए कश्मीर' के तरजुमा के मुताबिक उन राजाओं के अहवाल से अपनी तारीख शुरू की है। जिन्हें कल्हन पण्डित ने अपनी राजतरंगिनी में तर्क कर दिया था। यहाँ गोविद सानी तक जो तजकिरा किया गया है सबका सब मुल्ला अहमद की 'वाकये कश्मीर' से माखोज हैं।' (पृष्ठ १४-१५) तारीख हसन कश्मीर के मुसलमानो मे बहुत प्रचलित है। इसलिए कश्मीर के इतिहास का वास्तविक ज्ञान कश्मीर उपत्यका की मुसलिम जनता को कम प्राप्त हो सका है। लुप्त राजाओं के विषय में हसन का वर्णन उनके शब्दो में देना अच्छा है। 'मुसन्निफ ने कश्मीर की यह तारीख चार जिल्दो में मदून की है। जिल्द अव्वल मे जुगराफिया का बयान है। उसमें इक्त सादियात पैदावार आसार करीमा और शहराए सबक़ा मुफस्सल और निहायत दिल आवेज हाल मिलता है। हक तो यह है कि यह अपनी नवैयत का पहला कारनामा है और अपनी अफाहियत की वजह से बड़ी ही अहम तालीफ है। जिल्द दोयम मे जिसका उर्दू तरजुमा इन ओराक के साथ कारहन है। कदीम हिन्दू राजाओं सलातीन व मल्कूत मुतल्लिकाएँ कश्मीर सलातीन चुगताइया, अफागना, सिख और डोगरा हुक्मदानो के हालात हैं। जिल्द सोयम और चहारम सूफिया औलियाए कराम उलमा और शोहरा के हाल पर मुस्तमिल है। 'जिल्द अव्वल एक मशरकी तर्ज के मुख्तसर मुवदमा से शुरू होती है। ओवस्लन अकातीन आलम और जुगराफिया फलकी व सबई का बयान है। यह हिस्साए असमी नुक्ता निगाह से ज्यादा बकी नही। और गालिवन इब्तदाई दरसी किताबों से माखूज है। हिस्साए मावद पूरे तौर पर कश्मीर से मुतअल्लिक है। अगर ये इसमें ओरेल स्टाइन के कदीम जोगराफिया कश्मीर या कनिघम की एक ऐसी (दिक्कत) नजर नही मिलती ताहम इसकी बफादियत से भी इन्कार नही किया जा सकता। जिल्द दोयम में गयासो मदो जजर का बयान है। वकोल मुसन्निफ उसमें मुन्दरजः जैल माखोनों से इस्तफादा हासिल किया गया है। (२) वाक्ये कश्मीर : मुसन्निफ़ा अल्लामा अहमद काश्मोरी—इसके मुतल्लिक सतूर बाला में इशारा हो चुका है। इस किताब की मदद से मुसन्निफ ने उन पैंतीस राजाओ का तजकिरा मुरत्तन किया है जिनके हालात कल्हण की राजतरंगिणी में भी नही मिलते। अलावा अजई उन ६ राजाओ का तजकिरा भी इस किताब का रहीने मिन्नत है। जिन्होने १६१ सन् से ४१४ ईसवी तक और फिर रानादित्य के अहद हकूमत ४१४-४७४ के बाद ५७१ ई० तक काश्मीर पर हुक्मदानी की। यहाँ इस चीज का जिक्र दिलचस्पी से खाली न होगा कि कल्हण को जब इन सात राजाओं के हालात दस्तयाव न हो सके तो उसने रानादित्य के अहदे हकूमत ३०० वर्ष मुतैय्यन करके इस खला को पूरा करने की कोशिश की। जाहिर है कि अकले सलीम इसके मानने से कासिर है और कल्हण का यह कोल महज वर बजन सुखन है। हमारे मुसन्निफ की इस दरयाफ्त ने तारीख कश्मीर को मुकम्मल कर दिया और यह एक बडी ही अहम कडी है जो तारीख हसन के अलावा कही और दस्तयाव नही होती। कारैन की दिलचस्पी के लिए इन राजाओं की फहरिस्त दर्ज जैल है।'"