राजतरंगिणी (महाकवि कल्हण - सम्पूर्ण काश्मीर व भारत राजवंश इतिहास)
Rajatarangini of Kalhana with Hindi Translation
महाकवि कल्हण / पं. रघुनाथ सिंह द्वारा
पृष्ठ 231, कुल 984 में से
संदर्भ में पढ़ें१४८ राजतरंगिणी म्लेच्छैः संच्छादिते देशे स तदुच्छित्तये नृपः । तपस्संतोषिताल्लेभे भूतेशात्सुकृती सुतम् ॥१०७॥ १०७. म्लेच्छों से कश्मीर देश संछादित हो गया था अतएव राजा ने कठोर तपस्या कर भूतेश से वरस्वरूप जलौक नामक पुत्र उनके संहार निमित्त प्राप्त किया ।
[बायाँ स्तम्भ / Left Column] मूल मन्दिर नष्ट हो गया तो उससे सम्बन्धित इमारतों आदि का नष्ट होना स्वाभाविक था । उसी के साथ अशोकेश्वर का मन्दिर भी नष्ट हो गया । कश्मीर में भविष्य के सभी राजा, रानी, मन्त्री तथा गणमान्य लोग अपने नामों से मूर्तियों की स्थापना तथा मन्दिरों का निर्माण कराने लगे । अपने नामों के अन्त में शिव मन्दिर के लिये ईश्वर तथा विष्णु मन्दिर के लिये स्वामी शब्द जोड़ कर मन्दिर तथा मूर्ति का नाम रख देते थे । वह प्रथा कश्मीर के बौद्ध विहारों के सम्बन्ध में नहीं मिली है । यदि एकाध होंगे तो वे भी हिन्दू राजाओं द्वारा अपने नाम से बनवा दिये गये होंगे । परन्तु सर्वमान्य प्रथा यह नहीं हो सकी थी । मठों तथा शालाएँ भी व्यक्ति विशेष के नाम पर निर्माण कराये जाते थे जैसे दिड्डामठ आदि । इनका उदाहरण यथास्थान दिया गया है । पण्डरेथन अर्थात् पुराधिष्ठान के दो मील ऊपर पांडुचक में प्राप्त मन्दिर को अशोकेश्वर का मन्दिर कहा जाता है । किन्तु यह भ्रान्ति मात्र है । पांडुचक वास्तव में पाण्डव तीर्थ जनश्रुति के अनुसार है । नीलमतपुराण में पाण्डव तीर्थ का स्पष्ट वर्णन मिलता है । (नीलमत १३२३ तथा स्टेन पृष्ठ १०७)
[दायाँ स्तम्भ / Right Column] होता है । बोधायन ने म्लेच्छ शब्द की परिभाषा दी है । गोमांसखादको यस्तु विरुद्धं बहु भाषते । मर्यादाचारविहीनश्च म्लेच्छ इत्यभिधीयते ॥ म्लेच्छ देश में उत्पन्न लोगों को भी म्लेच्छ कहा गया है । म्लेच्छः गद्देशः उत्पत्तिस्थानत्वेन अस्ति अस्य, म्लेच्छः ... । अमरकोषकार परिभाषा देता है । उन्हें सीमा प्रान्त की संज्ञा देता है । प्रत्यन्तो म्लेच्छदेशः स्यात् । कल्हण ने यूनानियों के अर्थ में ही यहाँ म्लेच्छ शब्द का व्यवहार किया है । भारत की पश्चिम- उत्तर की सीमा पर निवसित विदेशियों को म्लेच्छ कहा जाता रहा है । यह शब्द अहिन्दुओं के लिये व्यवहृत किया गया है । यूनानियों ने बर्बर शब्द का जिस अर्थ में प्रयोग किया है उसी अर्थ में म्लेच्छ शब्द का प्रयोग भारतीयों ने किया है । शतपथ ब्राह्मण में म्लेच्छ भाषा का निर्देश प्राप्त है । जहाँ उसे अनार्य लोगों की बर्बर भाषा कहा गया है । (श० ब्रा० ३:२:१:४) अरब वालों ने जिस समय ईरान जीता था ।