भारतकोश
राजतरंगिणी (महाकवि कल्हण - सम्पूर्ण काश्मीर व भारत राजवंश इतिहास)

राजतरंगिणी (महाकवि कल्हण - सम्पूर्ण काश्मीर व भारत राजवंश इतिहास)

Rajatarangini of Kalhana with Hindi Translation

महाकवि कल्हण / पं. रघुनाथ सिंह द्वारा

DevanagariHindipublished984 पृष्ठ

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पृष्ठ 284

प्रथम तरंग १६७ 'महाशाक्यः स नृपतिर्न शक्यो बाधितुं त्वया । तस्मिन्दृष्टे तु कल्याणि भविता ते तमःक्षयः ॥ १४१ ॥ अस्मद्गिरा प्रेषणीयो विहारकरणाय सः । दत्त्वा स्वहेमसंभारं त्वया मलिनितः खलैः ॥ १४२ ॥ तस्मिन्कृते न जायेत विहारच्छेदवैशसम् । तस्य तत्प्रेरकाणां च प्रायश्चित्तं कृतं भवेत् ॥ १४३ ॥ क्रुद्धैर्वादिभिरनुध्याता त्वद्वधाय प्रधाविता । अनुशिष्टा समाहूय बोधिसत्त्वैस्तदेत्यहम् ॥ १४४ ॥ १४१-१४४. 'उत्तेजित भिक्षुओं ने मेरे लिये सोचा । आपके वध निमित्त मुझे भेजा । उस समय बोधिसत्त्वों ने मुझे बुलाया । निम्नलिखित उपदेश दिये- 'कल्याणि ! वह राजा महाशाक्य' हैं। तुम उनका वध नहीं कर सकती । किन्तु उनका दर्शन करते ही तुम्हारा तम कम हो जायगा । खलों की प्रेरणा द्वारा उसने दोष किया है, हमारे नाम से तुम उसे प्रेरित करना कि वह अपना हेम संभार देकर विहार का निर्माण करा दे । ऐसा करने से विहार उच्छेद के दोष का भागी राजा न रहेगा और जिन खलों ने उसे उत्तेजित किया है उनके और उसके दोषों का इस प्रकार प्रायश्चित्त हो जायगा । कुछ ने 'विहार गिराने का राजा ने आदेश दिया' यह अनुवाद अंग्रेजी तथा हिन्दी में किया है। यहाँ दलन शब्द का प्रयोग किया है। दलन का अर्थ 'दबाना' अर्थात् विहारों को कुचलने किंवा दबाने का था। यह अर्थ अधिक समीचीन मालूम पड़ता है। महासम्मत था। महावंश में उल्लेख है क्षत्रिय वंशों में शिरोमणि महासम्मत वंश में महामुनि (बुद्ध) ने जन्म लिया।' पाठभेद : श्लोक संख्या १४१ में 'महाशाक्य' का पाठभेद 'महासत्त्व' मिलता है । श्लोक संख्या १४२ में 'स्वहेम' का पाठभेद 'दत्वाम्ब हेम' मिलता है । श्लोक संख्या १४४ में 'अनुशिष्टा' का 'अनुदिष्टा' तथा 'सत्त्वं' का पाठभेद 'सत्यं' मिलता है । पादटिप्पणियाँ : १४१ ( १ ) महाशाक्य : एक मत है कि शुद्ध पाठ महासम्मत है। महासम्मत तथा महाशाक्य में नाम मात्र का भेद है। महावंश (२:२३) के अनुसार भगवान् बुद्ध के वंश का नाम त्रिपिटक के अनुसार भगवान् बुद्ध शाक्य वंशीय थे । देवदह शाक्य थे । उनके पुत्र सिंहहनु थे । सिंहहनु के पुत्र शुद्धोधन थे । शुद्धोधन के पुत्र गौतम अर्थात् बुद्ध थे । गौतम गोत्र था । शाक्य क्षत्रियों की एक शाखा थी। यह शाखा राजा इक्ष्वाकु के रक्त से सम्बन्धित थी । भगवान् बुद्ध शाक्य मुनि हैं। उन्हें शाक्य में सर्वश्रेष्ठ होने के कारण उनको महाशाक्य की संज्ञा दी गयी है। महासम्मत शब्द का सम्बन्ध भगवान् बुद्ध के वंश किंवा जाति से था। महाशाक्य भगवान् का नाम शाक्यों में सर्व श्रेष्ठ किंवा महान् होने के कारण दिया गया था। वह विशेषण है। महाशाक्य शब्द का प्रयोग महासम्मत के स्थानपर अधिक उपयुक्त लगता है।