राजतरंगिणी (महाकवि कल्हण - सम्पूर्ण काश्मीर व भारत राजवंश इतिहास)
Rajatarangini of Kalhana with Hindi Translation
महाकवि कल्हण / पं. रघुनाथ सिंह द्वारा
पृष्ठ 345, कुल 984 में से
संदर्भ में पढ़ें२५२ राजतरंगिणी राजा तृतीयगोनन्दः प्राप्तराज्यस्तदन्तरं । यात्रायागादि नागानां प्रावर्तयत पूर्ववत् ॥ १८५ ॥ १८५. तदन्तर गोनन्द तृतीय^१ राजा हुआ। उसने पूर्ववत् नागयात्रा, नागयज्ञादि^२ प्रवर्तित किया।
जाता है। चुनांच आज भी यह राय मुन्दरज जेल मुकामों के नामों से दुरुस्त साबित होती है- अन्दर कोट, जोन कोट, शीदरह कोट, दूर- कोट, पट कोट और स्यालकोट। तारीख में इस दौर को कोट राज (या तवायोफ अलमलूकी) के नाम से ताबीर किया जाता है। कश्मीर में यह दौर काफी मुद्दत तक जारी रहा। उस जमाना में कोट हाकिम को मन्सब (सरदार) कहा जाता था।
'अपनी असली दौलत पर काना न होकर इन कोट राजों ने एक दूसरे पर चढ़ाई शुरू कर दी। नतीजा मगलूब हुक्मरान को राजा जम्मू की तरफ मुतवज्जह होना पड़ा। उसने अपने बेटे कुअर दयाकरन की सरकर्दगी में एक बड़ी भारी फौज भेज दी। जिससे बहुत थोडे अरसा में अमन और अमान बहाल हो गया। उसी वक्त से राजा जम्मू की हकूमत भी कश्मीर में दाग- बेल पडी। कहा जाता है कि इस राजा के खानदान के पचीस आदमियों ने छ सौ तिरपन साल तक सर जमीन कश्मीर पर हकूमत की। लेकिन इन बादशाहों के नाम की उनकी मुद्दत हकूमत और उनके कारनामो की तशरीह कोई मीरख भी न कर सका। हसन तारीख कश्मीर पृष्ठ ११-१२
पाठभेद : श्लोकसंख्या १८५ में 'गोनन्दः' का 'गोनर्दः' तथा 'प्राप्तराज्यस्त' का 'प्राप्तो राज्ये तद' पाठ- भेद मिलता है।
पादटिप्पणियाँ : १८५ (१) गोनन्द : आइने अकबरी में नाम राजा मेनुन्द तथा राज्यकाल ३५ वर्ष दिया गया है। बेबुद्दीन कहता है । गोनन्द राजा बनाया गया था। वह अभिमन्यु का पुत्र नहीं था। वह यह भी लिखता है। राजा के सेनापति नन्दराम ने नर्मदा तक हिन्दुस्तान का फतह किया था। किन्तु सेणक के मत का कहीं से समर्थन नहीं मिलता है। इस राजा ने नर्मदा तक विजय किया था। इसका भी प्रमाण नहीं मिलता। हसन कहता है - राजा गोनन्द सोयम राजा सर के कबीले में से था। क० संवत् १८४२ में ताज हकूमत सर पर रखकर अद्दल व एहसान और मखलूक खुदा की फलाह व बहबूद में दिल व जान से काशा रहकर उन्हें आराम आसाइश पहुँचाई। सलोश की उमदगी और अच्छे कामों की बदौलत सरजमीन कश्मीर से मजहब जैन का गलबा और शिद्दत बरफबारी खतम हो गयी। ३५ बरस बादशाह रहकर इस दारेफानी से रुखसत हुआ। हुस्न नीयत की बरकत से बहुत से पोते पड़पोते उसकी ज़रीयत से इस मुल्क के हाकिम हुए। इसके खान्दान के हुक्मरानो का कुल मुद्दत हकूमत दो हजार छह सौ मुतएन की गयी है। पृष्ठ ४४ हसन की काल गणना अत्यन्त दोषपूर्ण है। (२) गोनन्द तृतीय : गोनन्द तृतीय कौन था? उसकी वंश परम्परा क्या थी? उसे राज्य कैसे प्राप्त हुआ? आदि इन बातो की ओर किंचित् मात्र संकेत कल्हण नही करता। राजा अभिमन्यु प्रथम के समान गोनन्द ने अपने भाग्य अथवा पराक्रम से कश्मीर मण्डल का राज्य प्राप्त किया होगा। राजा अभिमन्यु के किसी वंशज, सम्बन्धी आदि का कोई वर्णन कल्हण ने नही दिया है।