राजतरंगिणी (महाकवि कल्हण - सम्पूर्ण काश्मीर व भारत राजवंश इतिहास)
Rajatarangini of Kalhana with Hindi Translation
महाकवि कल्हण / पं. रघुनाथ सिंह द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें५६२ राजतरंगिणी अथ म्लेच्छगणाकीर्ण मण्डले चण्डचेष्टितः । तस्याऽऽत्मजोऽभून्मिहिरकुलः कालोपमो नृपः ॥ २८६ ॥ मिहिरकुल : २८६. म्लेच्छ १ गणों से मण्डल आकीर्ण होने पर उसका लड़का चण्डचेष्टा, काल स्वरूप मिहिरकुल २ राजा हुआ ।
से बादशाहत करके दुनिया से रुखसत हुआ । (२) हिरण्योत्स : इस स्थान का पता नहीं चलता। (३) वसुकुल : आइने अकबरी में नाम 'हवि- दकह' तथा उसका राज्यकाल ६० वर्ष दिया गया है। हसन कहता है— राजा 'बस: कुल' राजा हरन्यगुस का बेटा था । इसने भी साठ साल हुकूमत किया । लौकिक वर्ष २३१२ में कश्मीर के राज्य सिंहासन पर बैठा होगा । २८९ (१) म्लेच्छ : पाँचवीं शताब्दी के प्रयोग में आमू दरया के उपत्यका के हूण जुअन जाति से मुक्ति पाकर शक्तिशाली हो गये । शासकों के वंश के कारण येथा-इफथेलाइट कहे जाने लगे । यूनानियों ने इन्हे श्वेत हूण कहा है। यही शब्द आज प्रचलित हैं । यहाँ म्लेच्छ शब्द से इफथे- लाइट हूणों से तात्पर्य हैं । इन हूणों ने आमू दरया के समीपवर्ती प्रदेशो पर अपना राज्य स्थापित किया था । यूनानी बौद्ध सभ्यता का अफगानिस्तान में नाश किया । उत्तरी भारत में राज्य विस्तार कर स्यालकोट को अपनी राजधानी बनाया। भागवत पुराण के अनुसार हूणो पर भरत ने अपनी दिग्विजय यात्रा में विजय प्राप्त की थी । (भागवत ९ २० : ३०) । मत्स्य पुराण में १९ हूणों का वर्णन मिलता है । (मत्स्यपुराण २७२ : ९) हसन लिखता है—'राजा मिहिरकुल राजा वसुकुल का बेटा था । क० २३३६ में हकूमत का झण्डा बुलन्द किया । खुदा का खौफ न होने और बेरहमी और ग़ज़बनाकी में बेमिशाल था । थोड़े जुर्म पर कत्ल करने से गुरेज नहीं करता था । किसी दिन भी खून रेज़ी के बग़ैर चैन न लेता । रहम करने के नाम व निशान का उसको पता तक न था । परिन्दे और चरिन्दे मक़तूलों के गोश्त की उम्मीद में उसके साथ-साथ जाया करते थे । इसके जमाने में तुरकिस्तान के एक हाकिम ने कश्मीर पर हमला कर दिया । राजा ने इन्तहाई जवाँ मरदी, बहादुरी और इस्तकलाल के साथ उसके हमला का मुंहतोड़ जवाब दिया । जिसके नतीजा में बहुत से सिपाही मक़तूल और जख्मी हुए । बिल आखिर शिकस्त खाकर भाग गया । चन्द्रकुल नाम की एक नहर परगना खादिर पारा में खुदवायी । दौरान खुदाई में कोह आसार व अगर के पुश्ता में एक बड़ा भारी पत्थर सदराह हो गया और किसी भी तदवीर और हीला से अपनी जगह से न हिला । यह देखकर राजा को सख्त फिक्र हुई । पूजापाठ के बाद ख्वाब में एक आदमी देखा । जो उससे कह रहा था कि हर वह औरत जो गुनाह बद- कारी से पाक व साफ होगी जब इस पत्थर पर हाथ रखेगी तो वह फौरन मादूम हो जायगा । राजा ने इसी इल्हाम के बमूजिब हर तरफ से औरतो की जमायतों को अहद करवाया । लेकिन किसी एक के भी हाथ लगने से वह पत्थर अपनी जगह से न हिला । राजा निहायत गज़ब- नाक हुआ और औरतों को जिनारकारी और बच्चों को हरामजदगी और मर्दों का बेबस और बेहयाई के बहाने से कत्ल आम कर दिया । कैफियत—'मोरखों ने औरत, बच्चे और मर्द मक़तूलांन की तादाद तीन करोड़ लिखी है लेकिन बाज तीन लाख तक खयाल करते हैं । 'आखिरकार चन्द्रवती जो एक कुम्हार की लड़की थी हाजिर हुई । उसने राजा को बड़े गुस्सा