भारतकोश
राजतरंगिणी (महाकवि कल्हण - सम्पूर्ण काश्मीर व भारत राजवंश इतिहास)

राजतरंगिणी (महाकवि कल्हण - सम्पूर्ण काश्मीर व भारत राजवंश इतिहास)

Rajatarangini of Kalhana with Hindi Translation

महाकवि कल्हण / पं. रघुनाथ सिंह द्वारा

DevanagariHindipublished984 पृष्ठ

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पृष्ठ 399

७५२ | राजतरंगिणी अथ म्लेच्छगणाकीर्ण मण्डले चण्डचेष्टितः । तस्याऽत्मजोऽभून्मिहिरकुलः कालोपमो नृपः ॥ २८९ ॥ मिहिरकुल : २८९. म्लेच्छ¹ गणों से मण्डल आकीर्ण होने पर उसका लड़का चण्डचेष्टा, काल स्वरूप मिहिरकुल² राजा हुआ । ये बादशाहत करके दुनिया से रुखसत हुआ । (२) हिरण्योत्स : इस स्थान का पता नहीं चलता । (३) वसुबुल : आइने अकबरी में नाम 'दरि- स्वह' तथा उसका राज्यकाल ६० वर्ष दिया गया है। हसन कहता है - राजा 'बसः कुल' राजा हिरण्यकुल का बेटा था। इसने भी साठ साल हकूमत किया । लौकिक वर्ष २४१२ में कश्मीर के राज्य सिंहासन पर बैठा होगा । २८९ (१) म्लेच्छ : पाँचवीं शताब्दी के प्रयोग में आमू दरया के उपत्यका के हूण जुअन जाति से मुक्ति पाकर शक्तिशाली हो गये । शासकों के वंश के कारण येया-इफयेलाइट कहे जाने लगे । यूनानियों ने इन्हें श्वेत हूण कहा है। यही शब्द आज प्रचलित है। यहाँ म्लेच्छ शब्द से इफये- लाइट हूणो से तात्पर्य है। इन हूणो ने आमू दरया के समीपवर्ती प्रदेशो पर अपना राज्य स्थापित किया था। यूनानी बौद्ध सभ्यता का अफगानिस्तान मे नाश किया । उत्तरी भारत में राज्य विस्तार कर स्यालकोट का अपनी राजधानी बनाया। भागवत पुराण के अनुसार हूणो पर भरत ने अपनी दिग्विजय यात्रा मे विजय प्राप्त की थी । (भागवत ९ २० : ३०)। मत्स्य पुराण में ११ हूणो का वर्णन मिलता है। (मत्स्यपुराण २७२ : ९) हसन लिखता है—'राजा मिहिरकुल राजा बसुकुल का बेटा था। क० २३३६ में हकूमत का झण्डा बुलन्द किया । खुदा का खौफ न होने और बेरहमो और गज़बनाकी में बेमिसाल था । थोडे जुर्म पर कत्ल करने से गुरेज नही करता था । किसी दिन भी खून रेजी के बगैर चैन न लेता । रहम करने के नाम व निशान का उसकी पता तक न था । परिन्दे और चरिन्दे मक्तूलों के गोश्त की उम्मीद में उसके साथ-साथ जाया करते थे । उसके जमाने में तुर्किस्तान के एक हाकिम ने कश्मीर पर हमला कर दिया। राजा ने इन्तहाई जराँ मरदी, बहादुरी और इस्तक़लाल के साथ उसके हमला का मुँहतोड़ जवाब दिया। जिसके नतीजा में बहुत से सिपाही मक्तूल और ज़ख्मी हुए । बिल आखिर शिकस्त खाकर भाग गया । चन्द्रकुल नाम की एक नहर परगना शादिर पारा में खुदवायो । दौरान खुदवाई मे मोहे असर व अगर के पुश्ता में एक बड़ा भारी पत्थर सदराह हो गया और किसी भी तदबीर और हीला से अपनी जगह से न हिला । यह देखकर राजा को सख्त फिकर हुई । पूजापाठ के बाद ख्वाब में एक आदमी देखा । जो उससे कह रहा था कि हर वह औरत जो गुनाह बद- कारी मे पाक व साफ होगी जब इस पत्थर पर हाथ रखेगी तो यह फौरन नाबूद हो जायगा । राजा ने इसी इलहाम के बमूजिब हर तरफ से औरतों की जमायतों को अहड़ करवाया । लेकिन किसी एक के भी हाथ लगने से वह पत्थर अपनी जगह से न हिला । राजा निहायत ग़ज़ब- नाक हुआ और औरतों को ज़िनारकारी और बच्चों को हरामज़दगी और मरदो का बेबस और बेहयाई के बहाने से कत्ल आम कर दिया । कैफियत—'मोरखों ने औरत, बच्चे और मद मक्तूलोंन की तादाद तीन करोड़ लिखी है लेकिन बाज तीन लाख तक साबत करते हैं । 'आखिरकार चन्द्रवती जो एक कुम्हार की लड़की थी हाज़िर हुई । उसने राजा को बड़े गुस्सा