भारतकोश
राजतरंगिणी (महाकवि कल्हण - सम्पूर्ण काश्मीर व भारत राजवंश इतिहास)

राजतरंगिणी (महाकवि कल्हण - सम्पूर्ण काश्मीर व भारत राजवंश इतिहास)

Rajatarangini of Kalhana with Hindi Translation

महाकवि कल्हण / पं. रघुनाथ सिंह द्वारा

DevanagariHindipublished984 पृष्ठ

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पृष्ठ 470

प्रथम तरंग ३४९ षड्दिनां वर्षषष्टिं पालयित्वा स मेदिनीम् । भोक्तुं पुण्यपरीपाकं लोकान्सुकृतिनामगात् ॥ ३४५ ॥ ३४५. उसने साठ वर्ष छह दिन¹ मेदिनी का पालन करके, पुण्य परिपाक भोग हेतु, सुकृ- तियों के लोक में प्रस्थान किया । गोकर्णस्तत्सुतः क्षोणीं गोकर्णेश्वरकृद्बधे । अष्टपञ्चाशतं वर्षांस्त्रिंशत्याऽह्नां विवर्जितान् ॥ ३४६ ॥ गोकर्ण:¹ ३४६. गोकर्णेश्वर² का निर्माता उसके पुत्र गोकर्ण ने तीस दिन कम अट्ठावन वर्ष³ पृथ्वी पर शासन किया । प्रतीत होता है, कल्हण ने गोपादित्य सम्बन्धी प्रशस्तियों से अपनी लेखन सामग्री ली थी । प्रशस्ति के लिये टिप्पणी पृ० १३ 'प्रशस्ति पट्ट' द्रष्टव्य हैं। (२) पशुह्वय-- यज्ञ में पशुहत्या विहित थी । अतएव राजा ने पशुहत्या यज्ञ के अतिरिक्त सब स्थानों पर बन्द करवा दी । कश्मीर शीत प्रधान देश है। तथापि उसने धर्म भावना से प्रेरित होकर पशुहत्या वर्जित कर दी । प्रतीत होता है । राजा धर्मभीरु था । सुधारक था । पाठभेद : श्लोक संख्या ३४५ में 'सपद्दिनां' का 'सपण्मासा' तथा 'परीपाकं' का पाठभेद 'परिपाकं' तथा 'परो पार्क' मिलता है । पादटिप्पणियाँ : ३४५. (१) छह दिन : कुछ विद्वानो का मत है कि 'छह दिन' के स्थान पर 'छह मास' होना चाहिए। श्री स्टीन तथा श्री रणजीत सीताराम पण्डित दोनों ने ही ६ दिन हो पाठ ठीक माना है। पाठ दोनों ही मिलते है । अतएव मैने प्रचलित पाठ के अनुसार '६ दिन' ही दिया है। किसी गणना पर इसका निश्चय करना कठिन है। श्री स्टीन ने ठीक लिखा है कि राजा युधिष्ठिर का राज्य काल नहीं दिया गया है। अतएव गणना करना कठिन है। श्री एस पी. पण्डित ने भी ६० वर्ष ६ दिन राज्य- काल माना है पाठभेद : श्लोक संख्या ३४६ में 'क्षोणी' का 'क्षौणी', दृधे' का 'दधे'; 'त्याऽह्नां' का 'त्यह्ना' तथा 'विवर्जि- तान्' का 'विवर्जनात्' पाठभेद मिलता हैं। पादटिप्पणियाँ : ३४६ (१) गोकर्ण : आइने अकबरी में राजा गोकर्ण को 'कुरेन' तथा उसका राज्यकाल ५७ वर्ष ११ दिन दिया गया है। हसन लिखता है-क. २०३४ में उसके (गोपादित्यके) बेटे राजा गोकर्ण ने इकबाल- मन्दी का ताज सर पर रखकर अठावन वरस सल्तनत किया। श्री स्टीन राज्याभिषेक का समय कल्हण की गणनानुसार लौकिक संवत् २७६७ वर्ष छठवीं मास तथा उन्नीसवीं दिन देते है। श्री एस० पी० पण्डित ने यह काल ईसा पूर्व ३११ वर्ष माना है। श्री जनरल कनिंघम के अनुसार राजा गोकर्ण का नाम किदार शैलो की मुद्रा पर टंकित मिला है। परन्तु बादमें उस मुद्रा के प्रति सन्देह प्रकट दिया गया है कि वास्तव में वह गोकर्ण की थी । श्री देवसेन श्री कनिंघम के मत का खण्डन करते हैं । (२) गोकर्णेश्वर : गोकर्णेश्वर महादेव का कहाँ स्थान था अभी तक पता नहीं चला है । गोकर्ण क्षेत्र