राजतरंगिणी (महाकवि कल्हण - सम्पूर्ण काश्मीर व भारत राजवंश इतिहास)
Rajatarangini of Kalhana with Hindi Translation
महाकवि कल्हण / पं. रघुनाथ सिंह द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंद्वितीय तरंग ३८५ क्वचिन्मडवराज्यान्तःस्थाने चण्डात्तपोज्ज्वले । तत्प्रभावेन फलितं वृक्षैस्तत्क्षणरोपितैः ॥१५॥ १५. मडव्य' राज्यान्तर्गत किसी चण्डावतपोज्ज्वल स्थान में उनके प्रभाव द्वारा तत्क्षण-रोपित वृक्ष फल युक्त हुए थे। पाठभेद : श्लोक संख्या १५ में 'मडवराज्या' का 'मडवरप्य', 'मारवराज्या'; 'तपोज्ज्वले' का 'तपोल्वने' तथा 'वेन' का 'प्रभावेण' पाठभेद मिलता है। पादटिप्पणियाँ : १५ (१) मडव राज्य : काश्मीर अत्यन्त प्राचीन काल से दो अंचलों में विभक्त है। उनका आजकल का नाम मराज तथ कमराज है। कामराज्य का अपभ्रंश कमराज तथा मडवराज्य काअपभ्रंश मराज है। श्रीनगर से वितस्ता के अधोभागवर्ती परगने कमराज तथा श्रीनगर से ऊपर वितस्ता के दोनों तटवर्ती परगने मडवराज के काश्मीर उपत्यका के उत्तरी पश्चिमी ७ परगने सुयहोम, जैनगिर, लोलो, उत्तर, मच्छपुर, हमल तथा द्रुहिन हैं। आईने अकबरी में अबुल फजल ने दोनों भागों की सीमा दोनों विभागों का मध्यवर्ती केन्द्र वर्तमान शेर-गढ़ी राज्य भवन का स्थान माना है। मराज कश्मीर उपत्यका का पूर्वीय भाग था। कमराज पश्चिमी भाग था। (आईने अकबरी २: ३६८) अबुल फजल ३८ परगनों में कश्मीर को विभाजित करता है। श्रीनगर मराज में था। उसके ऊपर के सभी परगने भी मराज में थे। हिन्दूराज्य काल में दोनों का प्रशासकीय विभाजन किस प्रकार था। निश्चयात्मक रूप से कहना कठिन है। लोक प्रकाश ने मराज की सीमा दी है : मध्ये मराजमित्युक्तं ग्रामपञ्चसहस्रकम् । धौवन्तकादारभ्य मनुवान्तं स्मृतं बुधैः ॥ ३ ॥ मनुवाराजभित्युक्तः पूतनाख्यस्थले किल । सतीसरसि प्रामाणां यथप्रमाणमुदीरितम् ॥ ४ ॥ —पृष्ठ ७८ ...मध्यस्थित, ५ सहस्र ग्रामों की 'मराज' और ४६ धौवन्तक से लेकर मनुवान्त को पवित्र होने के कारण मनुवाराज कहते हैं। सतीसर (कश्मीर) में ग्रामों का जो प्रमाण कहा गया है वह निम्न है। इसी प्रकार कमराज की भी परिभाषा दी गयी है। खोयाध्र्मिकादारभ्य कामराजं स्मृतं बुधैः । वातूललहरान्तं च नगरैः परिवारितः ॥ १ ॥ —पृष्ठ ७७ इस श्लोक में 'वातूल' का पाठभेद 'चामूल' भी प्राप्त है। यह पाठ समुचित प्रतीत होता है। खोयाध्र्मिक से लेकर लहर के अन्त तक नगरों से परिवृत क्षेत्र को विद्वानों ने कामराज कहा है। इस समय राज्य तीन प्रदेशों में विभक्त है—कश्मीर, जम्मू और लद्दाख। स्वाधीनता पूर्व के कश्मीर राज्य का तृतीयांश भूखण्ड इस समय पाकिस्तान के पास अनधिकृत रूप से हैं। कश्मीर उपत्यका बनिहाल मूल से आरम्भ होकर एक दिशा में लोलाव तथा दूसरी दिशा में बारहमूला तक विस्तृत है। लम्बाई चौरासी मिल तथा चौड़ाई चौबीस मिल है। अनन्त नाग के समीप केवल दस या बीस मील चौड़ी है। यह कश्मीर का हृदय है। डोगरा राज्य काल में जम्मू, कश्मीर तथा सर-हदी इलाकों के सूबों में विभक्त था। जम्मू प्रदेश में; जम्मू, उधमपुर, मीरपुर, कठुआ, पूंछ तथा चनेनी जिले थे। कश्मीर प्रदेश में अनन्त नाग, बारहमूला, मुजफ्फराबाद जिले थे। सरहदी इलाका में लद्दाख, गिलगित, तथा गिलगित आझेन्सी के जिले थे। पाकिस्तान के पास अनधिकृत रूप से मीरपुर जिला की तहसील भीमबर, तथा चार गांव, छम, देवा, चकला, तथा मनावर के अतिरिक्त शेष जिला है। पूंछ जिला में, जागीर पूंछ के बाग की पूरी तहसील, तथा हवेली की आधी तहसील पाकिस्तान