भारतकोश
राजतरंगिणी (महाकवि कल्हण - सम्पूर्ण काश्मीर व भारत राजवंश इतिहास)

राजतरंगिणी (महाकवि कल्हण - सम्पूर्ण काश्मीर व भारत राजवंश इतिहास)

Rajatarangini of Kalhana with Hindi Translation

महाकवि कल्हण / पं. रघुनाथ सिंह द्वारा

DevanagariHindipublished984 पृष्ठ

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पृष्ठ 623

४७२ राजतरंगिणी किरात कातरो मा भूः स्वयं संरक्ष्यते मया । बहुवन्धुस्तव सुतो वध्योऽप्ययमवान्धवः ॥ ३९ ॥ ३६. “ओः किरात' ! कातर मत हो। मैं स्वयं तुम्हारे पुत्र की जिसके बहुत बन्धु हैं; और बन्धु हीन उस वध्य की रक्षा करता हूँ। श्लोक सङ्ख्या ३९ में 'वध्यो' का पाठभेद 'वाध्यो' मिलता है। पादटिप्पणियाँ : ३९ (१) किरात : विन्ध्य तथा राजस्थान में रहने वालो एक आदिम जाति है। किरात शब्द अनार्यों के लिये बहुत प्रयुक्त किया गया है। राजस्थान तथा विन्ध्य के निवासी भीलों को किरात की संज्ञा हो जाती है। वंशानुक्रम तथा जाति के विचार से किरात एव भील में अन्तर है। इस जाति का इतिहास अत्यन्त प्राचीन है। यह पहाड़ी जाति है। महाभारत सभा पर्व (अ. २६) से प्रतीत होता है कि प्राग्ज्योतिष के समीप किरात प्रदेश था। हिमालय के पूर्व लौहित्य नदी के आगे किरात निवास करते थे। टालेमी ने किरात जाति का प्रदेश वर्मा का अराकान प्रदेश बताया है। पांचवी तथा छठी शताब्दियों के प्राप्त बर्मी तथा कम्बुज शिलालेखों से पता चलता है कि वहाँ के मूल निवासी किरात थे। इन प्रमाणो से माना जा सकता है कि पूर्वी हिमालय अंचल, भूटान, मणिपुर, वर्मा तथा कम्बुज (कम्ब्रोडिया) तक किरात जाति फैली थी। प्राग्ज्योतिष के राजा भगदत्त ने किरात तथा चीन का सेना के साथ अर्जुन से युद्ध किया था। महाकवि भारवि के किरातार्जुनोय महाकाव्य में पता चलना है कि महाभारत काल में किरात सैनिक तथा गुप्तचरों का कार्य करते थे। महादेव ने किरात वेश में अर्जुन से युद्ध किया था। नेपाल में प्राचीन किरात जाति आजकल किराती नाम से प्रसिद्ध है। वे वल्ली, माझ तथा पल्ल किरात वर्गों में विभक्त है। वल्ली किरान्त लिम्बू, पल्ल तथा तथा रायछ श्रेणियों में विभक्त है। लिम्बू किरात पत्नी खरीदते हैं। गरीब लिम्बू अपने ससुर के घर नौकरी कर पत्नी प्राप्त करता है। नेपाल की वंशावली से प्रतीत होता है कि महिर वंश के पश्चात् किरात वंश के २९ राजाओं ने नेपाल में शासन किया था। नेपाल के किरात बौद्ध तथा हिन्दू दोनों हैं। सिक्किम के पश्चिम मोरंग में आज भी किरात जाति रहती है। वराहमिहिर को बृहत् संहिता में भारत के दक्षिण पश्चिम किरात जनपद होने का उल्लेख किया गया है। शक्ति संगम तंत्र में 'तप्त कुण्ड' से 'राम क्षेत्राग्त' पर्यन्त किरात देश कहा गया है। यह विन्ध्य प्रदेश में स्थित है। किरात एक शिवावतार भी हुआ है। मूक नामक दानव का इसने सूकर रूप में वध किया है। ऋग्वेद में किरात तथा आकुलो दो असुरों का का उल्लेख मिलता है (ऋ० १०:५७:१; १०:६०:१; बृहद् देवता ७.११:१६; पं०ब्रा० १३:१२:५, श० ब्रा० २:१.४ १४, जै. ब्रा. ३:१६० । यह जाति सम्भवतः अनार्य थी। प्राचीन ग्रन्थो में प्रायः उनका सम्बन्ध पर्वतों तथा गुफाओं से जोड़ा गया है। उनकी मुख्य जीविका आखेट बतायो गयी है। अथर्ववेद (१०४ १४) में किरात का उल्लेख मिलता है। वाजसनेयी संहिता (३०.१६) तथा तैत्तिरीय ब्राह्मण में किराता का सम्बन्ध गुहा से बताया गया है। अभिप्राय यह मालूम होता है कि वे गुहावासी थे।