भारतकोश
राजतरंगिणी (महाकवि कल्हण - सम्पूर्ण काश्मीर व भारत राजवंश इतिहास)

राजतरंगिणी (महाकवि कल्हण - सम्पूर्ण काश्मीर व भारत राजवंश इतिहास)

Rajatarangini of Kalhana with Hindi Translation

महाकवि कल्हण / पं. रघुनाथ सिंह द्वारा

DevanagariHindipublished984 पृष्ठ

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पृष्ठ 784

तृतीय तरंग ५९९ काश्मीरेषु घनोदग्रमग्रहारं द्विजन्मनाम् । राजा मडवराज्ये यो भेडराख्यमकारयत् ॥४८१॥ ४८१. जिस राजा ने कश्मीर में मडव१ राज्य गत प्रभूत धन (पूर्ण) भेडर२ (ग्राम) ब्राह्मणों को अग्रहार में प्रदान किया । विशां विपाटितारिष्टमरिष्टोत्सादने व्यधात् । वल्लभा यस्य बिम्बोष्ठी बिम्बा विश्वेश्वरं हरम् ॥४८२॥ ४८२. जिसकी बिम्बोष्ठी 'बिम्बा' नाम्नी प्रिया ने अरिष्टोत्सादन में मनुष्यों के अनिष्ट नष्ट कर्ता विश्वेश्वर शिव (हर) को स्थापित किया । भ्रातरो मन्त्रिणस्तस्य त्रयो मठसुरौकसः । सेतोश्च कारका आसन् खङ्गशत्रुघ्नमालवाः ॥४८३॥ ४८३. खङ्ग, शत्रुघ्न एवं मालव नामक उसके तीन मन्त्रिवन्धुओं ने मठ, देवालय एवं सेतु निर्माण कराया । विलसन का मत है कि राजा ने विहार मन्दिर आदि का अपनी विदेशी प्रजा के कश्मीर में आकर ठहरने के लिए निर्माण कराया था । विर्दउद्दीन इस राजा को ईरान के राजा एज्दजर्द का समकालीन कहता है । उसने उत्तरीय पूर्वीय ईरान के जिलो को जीत लिया था । किन्तु यहाँ पर उसने बालादित्य को भ्रम से प्रतापादित्य समझ लिया है । पाठभेद : श्लोक संख्या ४८१ में 'भेडरा' का पाठभेद 'भेरडा' मिलता है । पादटिप्पणियाँ : ४८१ (१) मडवराज्य : तरंग २ : १५ पाद टिप्पणी द्रष्टव्य है । (२) भेडर : यह वर्तमान बिडर ग्राम है । ब्रिङ्ग परगना में है। सन् १८६१ में श्री स्टीन ने इस ग्राम की यात्रा की थी । ग्राम के मध्य में एक दृहा है । यह मन्दिर का ध्वंसावशेष है । उसमें से अलंकृत शिला खण्ड निकाल लिये गये हैं । समीपस्थ ब्राह्मणो का ग्राम हागल गुण्ड है । वहा दुर्गा की पूजा 'बिदा देवी' नाम से होती है । विंदा शब्द भेड का अपभ्रंश है । पाठभेद : श्लोक संख्या ४८२ में 'विपाटि' का पाठभेद 'विपर्टि' और 'विपति' मिलता है । पादटिप्पणियाँ : ४८२ (१) अरिष्टोत्सादन : मच्छहोम परगना में यह वर्तमान ग्राम रतसुन है। श्री स्टीन के सुझाव पर पण्डित काशीराम इस ग्राम में सन् १८६१ में गये थे परन्तु उन्हें यहां कुछ प्राप्त नहीं हुआ । पाठभेद : श्लोक संख्या ४८३ में 'रौकसोः' का पाठभेद 'रोकः' मिलता है । पादटिप्पणियाँ : ४८३ (१) सेतु : यहाँ सेतु का अर्थ कोई बाँध अथवा सेतु अर्थात् पुल लगाया जा सकता है। सेतु का प्रचलित अर्थ पुल ही है। परन्तु बाँध के अर्थ में भी इसका प्रयोग किया गया है