भारतकोश
राजतरंगिणी (महाकवि कल्हण - सम्पूर्ण काश्मीर व भारत राजवंश इतिहास)

राजतरंगिणी (महाकवि कल्हण - सम्पूर्ण काश्मीर व भारत राजवंश इतिहास)

Rajatarangini of Kalhana with Hindi Translation

महाकवि कल्हण / पं. रघुनाथ सिंह द्वारा

DevanagariHindipublished984 पृष्ठ

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पृष्ठ 808

परिशिष्ट क ११ सागर का उशीनर गिरि, तथा नीलमत का उसीरका है। कनसैल के उत्तर एक पहाड़ को उशीरगिरि कहते हैं। पंजाब के उत्तर पीरपंचास पर्वत श्रेणी है। वह दक्षिणी तथा दक्षिणो पश्चिमी कश्मीर की सीमा है। क्षेमेन्द्र उसे पंचाल धारा कहता है। नीलमत मे यह शब्द नहीं है। उसमें ब्रह्मा, विष्णु, महेश शिखर का उल्लेख है। तीनों बनिहाल पास के पश्चिम है। उनमें नौ बन्धन सबसे ऊँचा शिखर है। यहीं मत्स्यावतार में विष्णु ने नाव बाँधा था। हरमुकुट किंवा हरमुण्डपर्वत हरमुख शिखर उत्तरी कश्मीर का है। वह सत्तरह हजार फिट ऊँचा है। उत्तर मानस कश्मीरी गंगा का स्रोत है। इस पर्वत के उत्तर पूर्व पाद में हिमानी के समीपस्थ है। नन्दि क्षेत्र तथा भूतेश्वर के तीर्थ यही है। मन्दि पर्वत मुन्द लोक (कालोदक) को हिमानी से भरता है। भरत गिरि हरमुकुट के दक्षिण पूर्व है। अमरेश्वर हिमाच्छादित अमरनाथ है। महादेव गिर धुर पश्चिमी अत्यन्त उच्च शिखर है। वह सिन्धु उपत्यका तथा पूर्वीय पर्वत माला के मध्य है। इन्द्र कील तथा गौरी शिखर का नीलमत में वर्णन है। एक मत है। कश्मीर के पश्चिम किसी पर्वत का वह नाम है शारदी के समीप । नीलमत पुराण तीर्थों तथा पवित्र स्थानों का वर्णन करता है। मुख्य उनमें निम्नलिखित हैं : ज्ञात : एल पत्र नाग (विचार नाग ग्राम समीपस्थ) अक्षपाल नाग (अचबल), अनन्त नाग, बहुरूप (योरू ग्राम—पीरपंचाल पर्वत को दिशा में) भद्र काली (बदरकल ग्राम क्रमसर से चार मील दूरस्थ) भेड़ा देवी (बुदवार श्रीनगर से पश्चिम, गंगोद्भेद तीर्थ) भीमा देवी (फाक परगना में, डलतट पर खान ग्राम) भूतेश्वर (हरमुकुट पर्वत श्रुतसर) चक्रधर तीर्थ (तस्कदर उद्भ), चोर मोचन=चीर प्रमोचन (ग्रंग ग्राम) देवसर (छोटा सर, दक्षिण पूर्व उत्तर परगना) गणेश (गणेश बल लिदर नदी दक्षिण तटस्थ) गौतम नाग (अनन्त नाग के उत्तर) हंसद्वार (मुन्द प्रस्थ गिर केसमीप । एक मत इसे हुंजा मानता है) हस्तिकर्ण नाग (गांव बाग होम अर्थात् मरहोम के दक्षिण पूर्व दो मील पर) इष्टिका पथ (लार परगना में राम रादन गांव) ज्येष्ठेश (हरमुकुट पर्वत मूल भूतेश्वर वशिष्ठाश्रम वांगय समीपस्थ) कपटेश्वर, (कोथर ग्राम) कपिल तीर्थ (कपटेश्वर समीपस्थ ?) कालोदक (मुन्दकोल) कोटि तीर्थ (बारहमूला समीपस्थ कोटिसर) खण्ड पुच्छ नाग (अनन्त नाग समीपस्थ झनबल) लोकपुण्य, (द्रिंग परगना में लरिकपुर समीपस्थ नाग) लोवार (लिवर ग्राम—विजब्रोर से १० मिल उत्तर-पूर्व स्थित) महापद्म (उलर लेक) मानस (मनसा बल) नन्दन नाग। (नन्दन सर—दरहल पास समीपस्थ) नन्दिकुण्ड, नन्दि पर्वत, नन्दोश्वर (नन्दिक्षेत्र—हरमुकुट पर्वत पाद में) नारायण स्थान (भरस्तान ट्राल घाटी में) पंचहस्त (पंजय ग्राम—दिवसर परगना में) पाण्डव तीर्थ (पाण्ड चक—श्रीनगर से दक्षिण-पूर्व पाच मील स्थित) पुष्कर (पोस्कर-फिरोकपुर तथा कंग मध्य, पहाड़ी मूल की पूर्व दिशा में) राम तीर्थ (रामुह ग्राम) स्वयम्भू (मच्छीपुर परगना में सुयम ग्राम) सोदर नाग (सुदर बल) तक्षक नाग (जयवन स्रोत समीपस्थ जेवन स्थान) तारा सर (तर सर सिन्ध उपत्यका ?) त्रिपुरेश (त्रिफर गांव ढल से तीन मील दूरस्थ) वराहमूला (वारह मूला) वशिष्ठाश्रम (वंगथ) वासुकी नाग (एक नाग पंचहस्त उपत्यका के दक्षिण या भद्रव ?) (विजयेश्वर विजद्रार) अज्ञात : चन्द्रसर (सम्भवतः सिन्ध नदी तथा कश्मीर के मध्य ऊँचे पर्वत पर है)