राजतरंगिणी (महाकवि कल्हण - सम्पूर्ण काश्मीर व भारत राजवंश इतिहास)
Rajatarangini of Kalhana with Hindi Translation
महाकवि कल्हण / पं. रघुनाथ सिंह द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१८ राजतरंगिणी मिलिन्द प्रश्न के अनुसार ५०० नदियाँ हिमालय से और निकलती है। उनमे उक्त दस नदियाँ मुख्य है। पुराणो में कुछ और प्रसिद्ध नदियों का वर्णन है जो हिमालय से निकलती है। यथा—शतद्रु, इरावती, कुहू, गोमती, धूतपापा, बाहुदा, निशचीरा, गण्डकी, कौशकी (मार्कण्डेय पुराण ५७:१६।१८)। बौद्ध ग्रन्थों के अनुसार हिमालय में सात बडे सरोवरों का वर्णन मिलता है—अनतत्त दह (मान- सरोवर ), कण्ण मुण्ड, रथकार छद्दन्त, कुणाल मन्दाकिनी, तथा सीहप्प पातक । कहा गया है कि उक्त सरो- वरों का जल कभी ग्रीष्म ऋतु में भी तप्त नहीं होता । बौद्ध ग्रन्थो में मानसरोवर को कैलास तथा त्रिकूट पर्वतों से सम्बन्धित किया गया है। बौद्ध ग्रन्थों में हिमालय की विभिन्न श्रेणियो का उल्लेख मिलता है—अस्सकण्ण गिरि, इसिधर, उदक, रजत, कंचन, कर- वीक, कालगिरि, चित्तकूट, मणिदस्स, युगन्धर, सुरियपस्स, सुदस्सन । सेत अर्थात् श्वेत पर्वत को हिमालय के शिखरो में श्रेष्ठ कहा गया है। अपदान में लम्बक, गोतम, वसभ, सीमित, कोसिक, कदम्ब, भरिक आदि को हिमालय का पर्वत शृंग कहा गया है। चित्तकूट पर्वत को चित्रकूट नहीं समझना चाहिए। चित्तकूट पर्वत हिमालय के अन्तर्गत है। चित्रकूट विन्ध्य पहाडी का एक क्रम है। महावंश मे हिमालय का उल्लेख भगवान् के धातु भरे पात्र के सन्दर्भ मे आया है। हैमवत बौद्धो का एक सम्प्रदाय है। हिमालय की गोद में कश्मीर शिशु की तरह स्थित है इस पर प्रकाश डाल चुका हूँ। आधुनिक अर्थात् बीसवी शती के कश्मीर तथा कल्हण काल के कश्मीर की भौगोलिक सीमा तथा स्थिति में भिन्नता है। आधुनिक कश्मीर तथा हिमालय के साथ क्या सम्बन्ध है इस पर कुछ लिखना आवश्यक है। कालक्रम के अनुसार देशों की भौगो- लिक स्थिति उनके राजनीतिक स्थितियों के साथ परिवर्तित होती रही है। हिमालय के पर्वतों में कंचन पर्वत, मणि पर्वत, हिगुल पर्वत, अंजन पर्वत, सानु पर्वत, फलिक पर्वतो का उल्लेख मिलता है। (कुणाल जातक पृष्ठ ५०१ )। हिगुल पर्वत बलूचिस्तान में समुद्र तट से २० मील दूर अघोर अथवा हिगुल नदी से आरम्भ होता है। इसे हिगुल तथा हिगुला कहते है। शिखरों में मुख्य उल्लेख नगन पर्वत, तुमकुम, नन्ददेवी, त्रिशूल, नन्दकोट, दूणा गिरि, बद्रीनाथ, केदार नाथ, नील कंठ, गंगोत्तरी, श्रीकण्ठ बन्दर पंच, गोरोशृंग, काचन विंगा, नमच पखा, मिलता है। गोरोशृंग किचिन विंगा तथा धवलागिर सबसे ऊँचे शिखर नेपाल में है।