भारतकोश
राजतरंगिणी (महाकवि कल्हण - सम्पूर्ण काश्मीर व भारत राजवंश इतिहास)

राजतरंगिणी (महाकवि कल्हण - सम्पूर्ण काश्मीर व भारत राजवंश इतिहास)

Rajatarangini of Kalhana with Hindi Translation

महाकवि कल्हण / पं. रघुनाथ सिंह द्वारा

DevanagariHindipublished984 पृष्ठ

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परिशिष्ट ञ ७७ कुछ विद्वानों का कथन है कि शक लोग ईरान के पूर्वीय भाग हेलमण्ड अंचल में रहते थे । शकों का पुराना तथा नवीन सभी स्थान सीथिया नाम से सम्बोधित होता है । पूर्वी ईरान को शकस्तान कहते थे । वर्तमान नाम सीस्तान है । मध्यकालीन समय में इसे सिजिस्तान ईरानी तथा भारतीय शकद्वीप कहते थे । भारतवर्ष की आजादी के पश्चात् भारतीय ऐतिहासिकों के दृष्टिकोण में परिवर्तन हुआ है । नवीन अन्वेषणों अनुसन्धानों से भारतीय इतिहास पर नवीन प्रकाश पड़ रहा है। रूसी विद्वानों के मध्यएशिया की खोज करने, खनन कार्यों तथा प्राप्त अभिलेखों आदि के कारण भारतीय इतिहास की अनेक गुत्थियाँ जो अभी तक उलझी पड़ी है, उनके सुलझने की आशा हो गयी है । मध्यएशिया, अफगानिस्तान में अभी बहुत कुछ खोज तथा खनन कार्य करना बाकी पड़ा है। उनमें जितनी शीघ्रता से प्रगति होगी उतनी ही शीघ्रता पूर्वक भारतीय इतिहास पर प्रकाश पड़ेगा । भारतीय संस्कृति के विकास तथा उसके इतिहास पर भी मध्य- एशिया मुख्यतः शकों के इतिहास का वास्तविक ज्ञान होने पर नवीन दृष्टि से विवेकात्मक नवीन इतिहास रचना की आशा अनेक विद्वानों को होने लगी है । ०