भारतकोश
राजतरंगिणी (महाकवि कल्हण - सम्पूर्ण काश्मीर व भारत राजवंश इतिहास)

राजतरंगिणी (महाकवि कल्हण - सम्पूर्ण काश्मीर व भारत राजवंश इतिहास)

Rajatarangini of Kalhana with Hindi Translation

महाकवि कल्हण / पं. रघुनाथ सिंह द्वारा

DevanagariHindipublished984 पृष्ठ

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पृष्ठ 883

७६ राजतरंगिणी कैस्पियन सागर में गिरने वाली कुम एक और नदी है। सम्भवतः यह नदी कुमारी है। महाभारत में सुकुमारी तथा कुमारी नाम आता है। सभी लोग वोल्गा को प्रगविन सी कहते हैं, जिसका अर्थ सुकु- मारी होता है। पश्चिम से काश्यप सागर में मिलने वाली नदी 'कुर' है। महानदी वर्तमान नदी 'डान' है। इसका ईरानी नाम दन है। दन नाम ही दोन है। 'दन' तथा 'दोन' का अर्थ जल होता है। 'दन' का अर्थ नदी है। यह विशाल नदी है। अतएव उसे महानदीकी संज्ञा दी गयी है। 'अजोव' सागर में गिरती है। ईरानी घूमन्तू जातियां यथा सेमोरियन, गोथियन, सरमोनियन आदि प्राचीन काल में इस नदी की उपत्यका में रहती चली आई हैं। हिरोडोटस् डान नदी को शक द्वीप की पूर्वीय सीमा मानता है। शकद्वीप में सात वर्ष हैं। शकद्वीप के वर्णित सात वर्षों में गुरुमार तथा कुमार किंवा सुकुमारी तथा कुमारी अर्थात् वोल्गा तथा कुम नदी की उपत्यकाएं हैं। मणितोत्थन, मणिनजा नदी की उपत्यका है। मोदाको ऐतिहासिक मोडिया का क्षेत्र है। कुमुदोत्तर, यूनानी लेखको का कोमोडोई प्रदेश है। यह प्रदेश आमूदरया तक विस्तृत है। 'महाकास' किंवा 'महाकोष' 'अरवस' अर्थात् 'गोथिया' है। 'महापुरुष' शब्द लम्बे-चौड़े डील-डौल वाले लोगों के लिए प्रयोग किया जाता है। शकद्वीप का प्रारम्भिक भारतीय ब्राह्मण तथा बौद्ध ग्रन्थों में स्पष्ट उल्लेख नहीं मिलता। इस काल में पृथ्वी चार भागो में विभाजित की गयी थी। मौर्य तथा कुशान काल में जम्बूद्वीप के अन्तर्गत भारतवर्ष का बोध होने लगा। जम्बूद्वीप बृहत्तर भारतवर्ष के लिए प्रयुक्त किया जाता था। जम्बूद्वीप में उत्तर कुरु अर्थात् तरिम उपत्यका तथा तुर्किस्तान सम्मिलित था। कालान्तर में पृथ्वी सात वर्षों में विभाजित की गयी। कर्नल टाड का मत है कि शक जाति तक्षक थी। वे अस्ररमा अर्थात् शकद्वीप में शासन करते थे। (टाड एनाल्स एण्ड एण्डिक्वेरी आफ राजस्थान ४५) श्री वी० बी० आयर का मत है कि शक द्वीप आक्स नदी के मूल, जक्सर्टीज तथा वक्षु जलीय सिंचित क्षेत्र, ओर सिन्धु नदी में पानी जिन क्षेत्रो से बह- कर उत्तर-पश्चिम भारत में आता है वही शक देश है। शक तथा कुश द्वीपो का अस्तित्व भिन्न है। कुशद्वीप का उल्लेख लेखो में मिलता है। कुश अथवा कुशिया शब्द परशियन के बहुत से लेखों में मिलता है। हमदान लेख में (सम्राट् दारयूह ईसापूर्व ५१२- ४८६ वर्ष) राज्य का विस्तार दिया गया है। युमारा क्षेत्र वक्षु तथा सीर दरया के मध्य था। कुछ विद्वान् कुशद्वीप को मध्य मिश्र और कुछ अबोसीनिया मानते हैं। मुद्य नाम मिश्र का था। मुद्य तथा कुश परसियन सम्राटों के क्षत्रपोके क्षेत्र में वर्णित किये गये हैं। मिश्र कुशद्वीप नहीं हो सकता। कुशद्वीप का अफ्रीका के उत्तर-पश्चिम होना सम्भव प्रतीत होता है। मिश्र के परे और भारत के पश्चिमी समुद्र के ठीक पश्चिमोय छोर पर अबीसीनिया इस समय भी स्थित है। इसका कुशद्वीप होना सम्भव है। शकद्वीप का शाब्दिक अर्थ समुद्र या नदियों से घिरा भूखण्ड है। सात द्वीपों से वसुमती अर्थात् पृथ्वी बनी है। सप्त द्वीपों में—जम्बू, प्लक्ष, शाल्मली, कुश, क्रोंच, शक, तथा पुष्कर द्वीप हैं। शकद्वीप का नाम शाकद्वीप भी है। शक लोग शकद्वीप में रहते थे। यूनानियों ने इनका नाम सीथियन रखा है। पश्चिमा विद्वानो ने यही नाम शकों के लिए दिया है। प्राचीन पारसी लेखो में शको के तीन निवास- स्थानों का उल्लेख मिलता है।

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