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राजतरंगिणी (महाकवि कल्हण - सम्पूर्ण काश्मीर व भारत राजवंश इतिहास)

राजतरंगिणी (महाकवि कल्हण - सम्पूर्ण काश्मीर व भारत राजवंश इतिहास)

Rajatarangini of Kalhana with Hindi Translation

महाकवि कल्हण / पं. रघुनाथ सिंह द्वारा

DevanagariHindipublished984 पृष्ठ

पृष्ठ 886, कुल 984 में से

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पृष्ठ 886

परिशिष्ट झ ७९ छान्दोग्योपनिषद् में उद्दालक आरुणि ने सद्गुरुवाले शिष्य को अपने अंतिम लक्ष्य पर पहुँचने के उदा- हरण के सम्बन्ध में गान्धार का उल्लेख किया है। शतपथ ब्राह्मण के (११ : ४ : १) तथा अनुवर्ती वाक्यों में उद्दालक आरुणि का उदीच्यों किंवा उत्तरी देश गंधार ) के निवासियों से सम्बन्ध बताया गया है। छान्दोग्य उपनिषद् (६:१४) में गान्धार का स्पष्ट उल्लेख मिलता है। इसका उल्लेख उपनिषद् तथा ब्राह्मण काल के पश्चात् सूत्र काल तक किया गया है। बौधायन श्रौत सूत्र में गान्धार का उल्लेख मिलता है। (२१:१३) आपस्तम्ब श्रौत सूत्र (२२ : ६ : १८) में तथा हिरण्यकेशी श्रौत सूत्र (१७:६) में गान्धार का स्पष्ट उल्लेख है। ऋग्वेद तथा अथर्ववेद में गान्धार शब्द का उल्लेख एक जन के सम्बन्ध में किया गया है। वहाँ के निवासियों को गांधारी कहा गया है। (ऋ० १:१२६ : १८) छान्दोग्योपनिषद् (६ : १४ : १२) तथा वैदिक साहित्य के अनुसार भारत के उत्तर-पश्चिम गान्धार एक जनपद था। राजा भाव्य अथवा भव्य द्वयय की स्त्री लोमसा ने गान्धार के वस्त्रों की बहुत प्रशंसा की है। भाव्य सिन्धु तटीय देश पर राज्य करता था। ऋग्वेद में गान्धार के भेंडो के ऊन की प्रशंसा की गयी है। (ऋग्वेद १:१२६ : १८) अथर्ववेद में अंगों तथा मगधों के साथ मूजबन्त तक गन्धार लोगों का उल्लेख किया गया है। अथर्ववेद का काल ऋग्वेद से बहुत पश्चात् का है। उस काल में भी जगत् को गान्धारों का यथेष्ट ज्ञान था (अथर्ववेद ५:२२:१४)। अथर्ववेद में गंधारियों किंवा गान्धारों का उल्लेख मूजवंतो के साथ किया गया है। उनकी गणना अवमानित जातियों में की गयी है। श्रौत सूत्रों में गान्धार जनपद तथा वहाँ के निवासियों का वर्णन मिलता है। कुछ विद्वानों का मत है। गान्धार निवासी कुभा अर्थात् काबुल नदी के तट, सिन्धु कुभा संगम, तथा सिन्धु के पूर्वीय तट पर कुछ दूर तक आबाद थे। कालान्तर में वे पारसी राज्य के अंग हो गये थे। पारसी राज फर्कसीज ने गान्धारों की सेना के साथ यूनान पर आक्रमण किया था। गान्धारराज नग्नजित का नाम वैदिक साहित्य सोम के स्थान पर अन्य वस्तु के उपयोग का मत दिया था। (शतपथ ब्राह्मण ८: १:४:१०; ऐतरेय ब्राह्मण ७:३४)। शतपथ ब्राह्मण (११ : ४ : १) में उद्दालक आरुणि का उदीच्यों अथवा उत्तरी देश गंधार के निवासियों के साथ संबन्ध बताया गया है। पुराणों में गान्धार का उल्लेख प्रचुर रूप से मिलता है। गान्धार का एक चन्द्र पौरववंशीय राजा था। उसके पिता का नाम आरद्वान किंवा अनुरुद्ध था। द्रुह्यु की चौथी पीढ़ी में हुआ था। उसने उत्तर- पश्चिम में गान्धार देश आबाद किया था। (वायु पुराण ९९:७:१० तथा विष्णु पुराण ४:१७:१)। गान्धार के नरेश को वायु तथा मत्स्य पुराणों ने द्रुह्युवंशी बताया है। (मत्स्य ४८:६; वायु ९९:९७) ब्रह्माण्ड पुराण के मत से गान्धार की चौथी पीढ़ी में प्रचेतस के एक शत पुत्र हुए थे। उन सबको म्लेच्छाधिप कहा गया है। (ब्रह्माण्ड पुराण ३ : ७४ : ११)। मत्स्य तथा ब्रह्माण्ड पुराणों में गान्धार का उल्लेख यवन, सिन्धु, सौवीर के साथ किया गया है। मत्स्य, वायु तथा विष्णु पुराणों में वर्णन है। द्रुह्यु के वंश में एक गान्धार उत्पन्न हुए थे। द्रुह्यु राजा ययाति के पुत्र थे। उन्हीं के नाम पर गान्धार देश का नामकरण किया गया था। (मत्स्य पुराण ४८; वायु पुराण; विष्णु पुराण ४ : १७) भागवत तथा ब्रह्म पुराण के अनुसार गान्धार द्रुह्यु की चौथी पीढ़ी में हुआ था। गान्धार के चार पुत्र धर्म, धृति, दुर्गम तथा प्रचेता थे। भागवत (९-२३-१५) ब्रह्म (१३) मत्स्य पुराण के अनुसार गान्धार को केवल धर्म, विदुध तथा प्रचेता तीन ही पुत्र थे। विष्णु पुराण तथा वाराह मिहिर के

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