राजतरंगिणी (महाकवि कल्हण - सम्पूर्ण काश्मीर व भारत राजवंश इतिहास)
Rajatarangini of Kalhana with Hindi Translation
महाकवि कल्हण / पं. रघुनाथ सिंह द्वारा
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बनाने का काम आज भी अलौकिक कार्य समझा जाता है । किन्तु कश्मीरी कलाकार की सहायता न लेकर गुह्यकों की सहायता पुल बनाने के लिए ली गयी । इसका अर्थ है कि यह जाति इस कला में निपुण थी । यक्ष नाम की भी एक जाति थी, जो कश्मीर में रहती थी । यक्षों को कालान्तर में मानव विशेष समझ लिया गया था । इसी प्रकार गुह्यकों को भी मानव विशेष समझा गया । परन्तु कल्हण के वर्णन से स्पष्ट हो जाता है गुह्यक एक जाति थी । उस जाति के लोग कश्मीर में आबाद थे । निर्माण कला में निपुण थे । कल्हण ने ( १:५९, १८४, ३ ३४९ ) से यक्ष का उल्लेख किया है । यक्षों के सन्दर्भ में कहा जाता है । उनका उपयोग सेतु अर्थात् पुल बनाने में किया गया था । पुराण, महाभारत में यक्ष के अन्तर्गत गुह्यक जाति मानी गयी है । अतएव राजा दामोदर ( ता० १:१५९ ) के काल तक यक्ष और गुह्यक दोनों जातियां कश्मीर में थीं ये परिश्रमी थीं । शिल्प उनका मुख्य कार्य था ।