राजतरंगिणी (महाकवि कल्हण - सम्पूर्ण काश्मीर व भारत राजवंश इतिहास)
Rajatarangini of Kalhana with Hindi Translation
महाकवि कल्हण / पं. रघुनाथ सिंह द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंपरिशिष्ट 'ठ' यक्ष ( तरंग १ : १५९-पृष्ठ २१८ ) कल्हण कश्मीर में प्रचलित किवदन्ती की ओर संकेत करता है। प्राचीन विशाल इमारतों का निर्माण विशाल शिलाखण्डों से किया गया है। उन्हें यक्षों ने किया था। वे मानवीय शक्ति के परे की बात है। कल्हण ने जिन भव्य भवनों तुंग निर्माणों का वर्णन किया है उनमें बहुतों के ध्वंसावशेष वर्तमान हैं। कश्मीरी मुसलमान उक्त निर्माणों को जिन तथा परियों का बनाया मानते हैं। किसी ग्रामीण से पूछने पर उत्तर मिलता है। पाण्डवों ने बनाया था। यक्ष शब्द ऋग् तथा अथर्ववेद में अनेक स्थलों पर आया है। ( ऋग्वेद १:१९०:४, ४:३:१३, ५:१०:४, ७:५६:१६, १०:८८:१३, ७:६१:५, अथर्ववेद ८:९:२५ १०:२:३२, १०:७:३८, १०:८:४३ ११:२:४ ) वायु, मत्स्य, ब्रह्माण्ड पुराणों में यक्ष शब्द प्रायः गन्धर्व तथा किन्नर के साथ आया है। यह सब हिमालय प्रदेश की पर्वतीय जातियाँ थी। अलवेरूनी ने गन्धर्वों को गायक जाति में गिना है। उनका संगीत तथा नृत्य पेशा माना है। ( मत्स्य : ११४:८२; ब्रह्माण्ड : २:१८:३३ ) गन्धर्वान किन्नरान् यक्षान् रक्षोविद्याधरोरगान् । कलायग्रामकांश्चैव तथा किंपुरुषान् खसान् ॥ हरिवंश पुराण, भविष्य पर्व ( ३३:११ ) में महर्षि, वसु, अप्सरा, गन्धर्व के साथ यक्ष का उल्लेख किया गया है। उन्हें कुबेर के भवन में निवास करना दिखाया गया है। ( वायु : ३९:५७ ) ( नीलमत : 1007-8 ) अग्नि पुराण ( १९ : १८ ) में उन्हें 'कश्यपपत्नीखसाजाता :' अर्थात् कश्यप की पत्नी खसा से यक्षों की उत्पत्ति हुई थी। यक्षों का वर्णन महाभारत में प्रचुर रूप से मिलता है। गुह्यकों के सन्दर्भ में यक्षों का उल्लेख किया गया है। महाभारत मे उन्हें देव योनि में रखा है। विराट अण्ड द्वारा ब्रह्मादि के उत्पन्न होने के पश्चात् यक्षो की उत्पत्ति बताई गयी है। महाभारत आदि पर्व ( १ : ३५ ) में यक्षों को पुलस्त्य मुनि की सन्तान कहा गया है ( आदि पर्व ६६ : ७ )। राक्षस रावण पुलस्त्य का नाती था। अतएव यक्षों का सम्बन्ध राक्षसों से माना गया है। यक्ष मानव थे। श्री शुकदेवजी ने यक्षों को महाभारत की कथा सुनायी थी। ( आदि पर्व १ : १०८ )। यक्षों ने कुबेर का राजपद पर अभिषेक किया था। ( वन पर्व १ : १०-११ ) पाण्डव भीम ने यक्षों तथा राक्षसों को पराजित किया था। ( वन पर्व १६० : ५७-५८ । ) सुन्द उपसुन्द ने यक्षों को पराजित और पीड़ित किया था। ( वन पर्व २०८ : ७ )। यम ने यक्ष का रूप धारण कर युधिष्ठिर से प्रश्नोत्तर किया। यक्ष के प्रश्नों का उत्तर देकर धर्म- राज युधिष्ठिर ने चारों भाइयों को यम से जीवित कराया था। ( वन पर्व ३१४ : १७ )। १२