भारतकोश
राजतरंगिणी (महाकवि कल्हण - सम्पूर्ण काश्मीर व भारत राजवंश इतिहास)

राजतरंगिणी (महाकवि कल्हण - सम्पूर्ण काश्मीर व भारत राजवंश इतिहास)

Rajatarangini of Kalhana with Hindi Translation

महाकवि कल्हण / पं. रघुनाथ सिंह द्वारा

DevanagariHindipublished984 पृष्ठ

पृष्ठ 913, कुल 984 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 913

१०४ राजतरंगिणी न पिशाचैस्तु वत्स्यामो दारुणैर्दाह्यप्रियैः । एवं ब्रुवति नागेन्द्रे नीलं विष्णुरभाषत ॥ 213 = २८६ x x x अल्पवीर्या पिशाचाश्च भविष्यन्तीह सर्वदा । वीर्योपेता गमिष्यन्ति षण्मासं यातुज्ञानेवम् ॥ 215 = २८८ x x x पिशाचैः सह संपर्कस्तत्र नित्यं यदा नृणाम् । तदा तेषां मतिः पापात्सततं नापसर्पति ॥ 244 = ३३१ x x x रज्जुबद्धेन तु यथा पक्षिणा नृपदारकाः । कल्पमानाः पिशाचैस्तु निर्वेदं परमं ययौ ॥ 327 = ४२८ x x x हिमेन शीतेन तथा पिशाचैः संपीड्यमानो द्विजवृद्धवर्यः । यग्राम तत्रैव विमूढचेता श्रमन्ययौ यत्र स नागराजः ॥ 328 = ४२९ x x x दैत्यदानवयक्षाश्च पिशाचाः राक्षसैः सह । वर्जनीयं तदा मांसं प्रयत्नादपि काश्यप ॥ 447 = ५५८, ५५७ x x x वेदोपवेदवेदाङ्गविद्यास्थानानि कृत्स्नशः । नागा यक्षाः पिशाचाश्च तथैव गुरुदासणी ॥ 586 = ७०७ x x x पूज्याः पिशाचाश्च तथा बलिपूर्वेण कर्मणा । देशानुसारः कर्तव्यो जनः कार्यः स्वधिष्ठितः ॥ 837 = १०००-१०१० पुराणो में निकुम्भ को इक्ष्वाकुवंशीय हर्यश्व राजा का पुत्र माना गया है । विष्णु पुराण ४ : २ : १३; वायु पुराण ८८ : ६२; भागवतपुराण ६ : ९ : २४-२५; मत्स्य पुराण १२ : ३३; पद्म पुराण : ८ । महाभारत निकुम्भ को प्रह्लाद का तृतीय पुत्र (आदि पर्व ६५ : १९) तथा एक विख्यात दानव (आदि पर्व ६५ : २६) और हिरण्यकश्यप के कुल में उत्पन्न सुन्द उपसुन्द के पिता रूप में चित्रित करता है । (आदि पर्व २०८ : २-३), शल्य पर्व (४५ : ५६) के अनुसार यह स्कन्द का एक सैनिक था । रामायण में निकुम्भ एक राक्षस योद्धा था । इसका वध नील ने किया था । (वाल्मीकीय रामायण युद्ध काण्ड ७३) । निकुम्भ नाम के अनेक व्यक्तियों का उल्लेख पुराणों में आया है । परन्तु इक्ष्वाकुवंशीय

राजतरंगिणी (महाकवि कल्हण - सम्पूर्ण काश्मीर व भारत राजवंश इतिहास) · पृष्ठ 913, कुल 984 में से · BharatKosha