भारतकोश
राजतरंगिणी (महाकवि कल्हण - सम्पूर्ण काश्मीर व भारत राजवंश इतिहास)

राजतरंगिणी (महाकवि कल्हण - सम्पूर्ण काश्मीर व भारत राजवंश इतिहास)

Rajatarangini of Kalhana with Hindi Translation

महाकवि कल्हण / पं. रघुनाथ सिंह द्वारा

DevanagariHindipublished984 पृष्ठ

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परिशिष्ट 'प' १३५ श्री बैउद्दीन ने कश्मीर के इतिहास, वहाँ को परंपरा तथा धर्मादि को पुरातन बाइबिल एवं कुरान शरीफ में वर्णित महात्मन् सुलेमान से जोड़ा है। कश्मीर को भारतीय परंपरा, इतिहास एवं धर्म से सर्वथा अलग रखा है। उसने राजाओं की जो तालिका उपस्थित की है, वह कुछ विचित्र ध्वनि करती है। उसने संस्कृत नामो के आगे 'खां' पद जोड दिया है। यह 'खां' शब्द भारत में मंगोल मुसलिम आक्र- मण के पश्चात् प्रचलित हुआ था। इसका सम्बन्ध मंगोल से फिलस्तीन की अपेक्षा अधिक है। सुन्दर खां के पहले कश्मीर में मूर्ति पूजा नही थी। उसके समय में आरम्भ हुई और वह अपने इस कार्य के लिए जनता द्वारा मारा गया था। किन्तु सुन्दर खां द्वितीय के समय सदा शिव की पूजा आरम्भ हो गयी। बैउद्दीन पारसी धर्म आतिशपरस्ती का कश्मीर में आना कहता है। कश्मीर का सम्बन्ध, फिलस्तीन, अफगानिस्तान, तुर्किस्तान तथा इस समय के मुसलिम जन बाहुल्य देशों से जोडने का प्रयत्न करता है।