राजयोग (स्वामी विवेकानन्द - पातञ्जल योगसूत्र भाष्य सहित)
Raja Yoga - Swami Vivekananda with Patanjali Yoga Sutras
स्वामी विवेकानन्द / महर्षि पतञ्जलि द्वारा
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विना, उसे केवल क्रमशः परिवर्तित करते हुए, इसी जन्म में शरीर तैयार करना हमारे लिए क्यो असम्भव होगा ? उनका यह भी विश्वास था कि पारा और गन्धक मे वडी अद्भुत शक्ति निहित है। इन द्रव्यो से एक विशेष तौर से वनी हुई चीजो द्वारा मनुष्य जितने दिन इच्छा हो शरीर को अक्षुण्ण वनाए रख सकता है। दूसरे कुछ लोगो का विश्वास था कि कुछ विशिष्ट औषधियो के सेवन से आकाश-गमन आदि सिद्धियाँ प्राप्त हो सकती है। आजकल की आश्चर्यजनक औषधियो का अधिकांश, विशेषत औषधि मे धातु का व्यवहार, हमने 'रसायन'-सम्प्रदायवालो के पास से पाया है। कोई-कोई योगी-सम्प्रदाय कहते है कि हमारे बहुतेरे प्रधान गुरुगण अभी भी अपनी पुरानी देहो में विद्यमान हैं। योग के वारे मे जिनका प्रामाण्य अकाट्य है, वे पतंजलि इसे अस्वीकार नही करते।
मन्त्रशक्ति—'मन्त्र' का अर्थ है कुछ पवित्र शब्द, जिनका निर्दिष्ट नियम से उच्चारण करने पर उनसे ये अद्भुत शक्तियाँ प्राप्त होती है। हम दिन-रात ऐसी अद्भुत घटनाओ के बीच रह रहे है कि हमे उनका कोई महत्त्व नही मालूम पडता, हम उन्हे साधारण समझते हैं। मनुष्य की शक्ति की, शब्द की शक्ति की और मन की शक्ति की कोई निर्दिष्ट सीमा नही है।
तपस्या—तुम देखोगे कि यह तप प्रत्येक धर्म मे है। धर्म के इन सब अगो के साधन मे हिन्दू सबसे वढे चढे है। तुम ऐसे अनेक लोग पाओगे, जो सारे जीवनभर अपना हाथ ऊपर उठाए रखते हैं, यहाँ तक कि अन्त में उनके हाथ सूखकर नष्ट हो जाते हैं। बहुत से लोग दिन-रात खडे ही रहते है, और अन्त में उनके पैर फूल जाते है। वे इतने कड़े हो जाते हैं