राजयोग (स्वामी विवेकानन्द - पातञ्जल योगसूत्र भाष्य सहित)

राजयोग (स्वामी विवेकानन्द - पातञ्जल योगसूत्र भाष्य सहित)
Raja Yoga - Swami Vivekananda with Patanjali Yoga Sutras
स्वामी विवेकानन्द / महर्षि पतञ्जलि द्वारा
DevanagariHindipublished307 पृष्ठ
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अध्यात्म प्राण का संयम ७५
जिन-जिन सम्प्रदायो मे बड़े-बड़े धर्मवीर पैदा हुए है, उन सभी सम्प्रदायो ने ब्रह्मचर्य पर विशेष जोर दिया है। इसीलिए विवाह-त्यागी सन्यासी-दल की उत्पत्ति हुई है। इस ब्रह्मचर्य का पूर्ण रूप से—तन-मन-वचन से—पालन करना नितान्त आवश्यक है। ब्रह्मचर्य बिना राजयोग की साधना बडे खतरे की है, क्योकि उससे अन्त में मस्तिष्क का विषम विकार पैदा हो सकता है। यदि कोई राजयोग का अभ्यास करे और साथ ही अपवित्र जीवन यापन करे, तो वह भला किस प्रकार योगी होने की आशा कर