राजपूताने का इतिहास (मेवाड़ राज्य का इतिहास व वीर गाथाएँ)
History of Rajputana & Mewar by Gaurishankar Ojha
महामहोपाध्याय पं. गौरीशंकर हीराचन्द ओझा द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंमहारावत सिंहा १२५ कुंवरी दिये हैं१ । बूंदी राज्य के मिश्रण कवि सूर्यमल-रचित 'वंशभास्कर'- नामक वृहद् ग्रंथ से उसके गंगाकुंवरी नामक पुत्री का होना भी पाया जाता है, जिसका विवाह वहां के राव भोज के पुत्र मनोहरदास से हुआ था२ । महारावत सिंहा का अधिक इतिहास उपलब्ध नहीं होता । उसके समय के केवल नीचे लिखे दो लेख मिले हैं, जिनसे उसका समय निश्चित करने के अतिरिक्त और कुछ इतिहास प्रकट नहीं होता है— (१) वि० सं० १६७६ कार्तिक सुदि ११ (ई० स० १६२२ ता० ४ नवं- बर) सोमवार का जोशी ईसरदास के नाम का ताम्रपत्र, जिसमें बहु राठोड़ तथा बहुरणी खानण का ३१ बीघा भूमि सूर्य-ग्रहण के अवसर पर दान करने का उल्लेख है३ । बाग बावड़ी करि परणाया ई राणीजी कै बेटी बाइ करमैतीजी त्या परणाइ छै गढ जोधपुर को धणी महाराजाजी श्रीजसवंतसिंघजी राठोड़ ...... । मूल शिलालेख की छाप से । (१) प्रतापगढ़ राज्य की पुरानी ख्यात; पृ० ६ । (२) ॰॰॰क्रम दुव व्याह मनोहर के किय, तहँ प्रभु राम सुनहु जिम जे किय ॥ ६६ ॥ सीसोदनि प्रथम सिंहसुता जो गंगा अभिधान गुनजुता॰॰॰ ॥ ६७ ॥ पृ० २४३१-३२ । (३) महाराज श्रीरावत सीगाजी वचनातु जोसी इसरदास योग्य अप्रंच खेत वीगा ३१ अंके अकतीस दीदा जेरी वगत खेत वीगा ११ बहुजी राठोड़ कमल्या महे दीदा खेत वीगा २० बहुजी रणी षानण महे घर षेती रु भड़ा सो दीदो अणी वगते वीगा ३१ सुरजपरब महे दीदा उदक अघाट कर दीदां मारा वंसरो कोही कद करसी नहीं स्वदत परदत