भारतकोश
राजपूताने का इतिहास (मेवाड़ राज्य का इतिहास व वीर गाथाएँ)

राजपूताने का इतिहास (मेवाड़ राज्य का इतिहास व वीर गाथाएँ)

History of Rajputana & Mewar by Gaurishankar Ojha

महामहोपाध्याय पं. गौरीशंकर हीराचन्द ओझा द्वारा

DevanagariHindipublished534 पृष्ठ

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महारावत हरिसिंह १४१ हरिसिंह महारावत हरिसिंह, जसवंतसिंह का दूसरा पुत्र था । उसका जन्म उक्त महारावत (जसवंतसिंह) की राणी चौहान खान की पुत्री राज्य प्राप्ति चंपाकुंवरी के उदर से हुआ था¹। जब महारावत जसवंतसिंह, महाराणा जगतसिंह के बुलाने पर उदयपुर गया, तब वह अपने ज्येष्ठ पुत्र महासिंह को तो अपने साथ ले गया था और छोटे पुत्र हरिसिंह को महाराणा की तरफ़ से धोखा होने के ख्याल से देवलिया में छोड़ गया था² । वि० सं० १६८५ (ई० स० १६२८) में उदयपुर में महाराणा की सेना द्वारा जसवंतसिंह और कुंवर महासिंह के मारे जाने का समाचार देवलिया में पहुंचने पर धमोतर के ठाकुर जोधसिंह (गोपालदास का पुत्र) ने हरिसिंह की गद्दीनशीनी की रसम पूरी की³ । उस समय उदयपुर के महाराणा जगतसिंह के कोप से बचने का महाराव के लिए बादशाही दरबार की शरण प्राप्त करने के अतिरिक्त महाराणा का देवलिया अन्य कोई साधन न था । इसलिए गद्दीनशीनी पर सेना भेजना के उपरांत ठाकुर जोधसिंह⁴ ने शीघ्रता पूर्वक उसको शाही दरबार में लेजाना ही उचित समझा (१) श्रीसिंहरावतजनुर्जसवन्तपत्नी चौहाणवंशवरभूषणखानपुत्री । श्रीरावतेन्द्रहरिसिंहकरावमाता चाम्पा इति व्यधित सा त्रिदशप्रतिष्ठाम् ॥ देवलिया के गोवर्धननाथ के मंदिर की प्रशस्ति । (२) वीरविनोद; द्वितीय भाग, पृ० ३१८ । (३) मुंहणोत नैणसी की ख्यात; प्रथम भाग, पृ० ६६ । वीरविनोद; द्वितीय भाग, पृ० १०६० । (४) एक ख्यात में महारावत हरिसिंह के समय देवलिया पर महाराणा की