भारतकोश
राजपूताने का इतिहास (मेवाड़ राज्य का इतिहास व वीर गाथाएँ)

राजपूताने का इतिहास (मेवाड़ राज्य का इतिहास व वीर गाथाएँ)

History of Rajputana & Mewar by Gaurishankar Ojha

महामहोपाध्याय पं. गौरीशंकर हीराचन्द ओझा द्वारा

DevanagariHindipublished534 पृष्ठ

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पृष्ठ 223

१७६ प्रतापगढ़ राज्य का इतिहास में कई ग्रंथों की रचना हुई। राज्य अधिक बड़ा न होने पर भी उसने अपने समय में कितने ही गांव ब्राह्मणों आदि को दान में दिये थे। उसका शरीर सुगठित और बलिष्ठ था। कवि गंगाराम ने 'हरिभूषण-महा- काव्य' की उसके नाम पर रचनाकर उसमें उसकी बहुत कुछ प्रशंसा की है, जो अत्युक्तिपूर्ण होने पर भी उसके गुणों पर अच्छा प्रकाश डालती है¹।

( १ ) नोष्णीशं शिरसि स्थितं दशशतच्छिद्रोऽपि नो कञ्चुको मालिन्यं न मुखे न चास्य सहगो दारिद्र्यनामा सखा। नो जानन्त्यवलोकितानपि पतींश्चित्रं कवीनां स्त्रियः शक्रादप्यधिकान्मनोंभवतनूंस्त्वद्दानलीलायितात् ॥ १७ ॥

येषां वेश्मनि जीर्णकोद्रवकरणैः क्षुद्रोदरं पूर्यते क्षुन्निद्रां हरते विमोचयति सा तन्द्रापराधीनता। वीर श्रीहरिसिंह तेऽपि कवयस्त्वद्दानलीलायिता- न्मातङ्गाधिपमारुहन्ति तुरगान्कृत्वा पुरः सज्जितान् ॥१८॥...

को वा तिष्ठति भूपतिः प्रथमतः श्रीदेवलेन्द्रप्रभोः साम्यं किञ्चिदुपेति वीर भवतो भूमण्डलाखण्डल । युद्धक्रुद्धपिनद्धवर्मसुभटे यत्खङ्गसंघट्टनाद् भ्रश्यद्वह्निकणैकदेशवडवावहिर्दहत्यम्बुधिम् ॥ २१ ॥...

युद्धे कर्मणि हस्तचर्मणि दृढं देहोल्लसद्धर्मणि प्रारूढे त्वयि वाहिनीबलिकोरेऽत्युच्चैस्तुरुष्कार्वणि। दृष्ट्वानेकमहीशसुन्दरवरान्नयन्ति देवाङ्गना धूलीदुर्गमुपेत्य भानुरवति स्वीयं वपुः प्रायशः ॥ २५ ॥

सर्ग आठवां ।