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राजपूताने का इतिहास (मेवाड़ राज्य का इतिहास व वीर गाथाएँ)

राजपूताने का इतिहास (मेवाड़ राज्य का इतिहास व वीर गाथाएँ)

History of Rajputana & Mewar by Gaurishankar Ojha

महामहोपाध्याय पं. गौरीशंकर हीराचन्द ओझा द्वारा

DevanagariHindipublished534 पृष्ठ

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१६६ प्रतापगढ़ राज्य का इतिहास कवि कल्याण-रचित "प्रताप-प्रशस्ति" खंडित काव्य¹ में उसकी माता मनभावती, मुख्य राणी पाटमदे, उसके पितृव्य मानसिंह, धमोतर के ठाकुर जोगीदास तथा उसके पुत्र जसकरण, जोगीदास के भाई भोगीदास और रायपुरवालों के पूर्वज दलपत, तुलसीदास, खरोटवालों के पूर्वज रूपसिंह, कल्याणपुरावालों के पूर्वज रणछोड़, भांतलावालों के पूर्वज कुशलसिंह, मंत्री वर्द्धमान, उदयभान हूंवड़, ग़रीबदास एवं महारावत के छोटे भाई अमरसिंह, मोहकमसिंह और माधवसिंह का भी परिचय दिया है। ( १ ) "प्रताप प्रशस्ति" में उसका रचना-काल नहीं दिया है; पर उसमें धमोतर के ठाकुर जोगीदास के भाई भोगीदास का उल्लेख है। देवलिया में भोगीदास के दो स्मारक लेख मिले हैं, जिनसे पाया जाता है कि वि० सं० १७३६ आषाढ वदि ३ ( ई० स० १६७६ ता० १६ जून ) को भोगीदास का देहांत हुआ। अतएव वि० सं० १७३० और १७३६ के बीच "प्रताप प्रशस्ति" की रचना होना संभव है।