राजपूताने का इतिहास (मेवाड़ राज्य का इतिहास व वीर गाथाएँ)

राजपूताने का इतिहास (मेवाड़ राज्य का इतिहास व वीर गाथाएँ)
History of Rajputana & Mewar by Gaurishankar Ojha
महामहोपाध्याय पं. गौरीशंकर हीराचन्द ओझा द्वारा
DevanagariHindipublished534 पृष्ठ
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पांचवां अध्याय महारावत पृथ्वीसिंह से सामन्तसिंह तक
पृथ्वीसिंह
महारावत प्रतापसिंह का परलोकवास होने पर वि० सं० १७६५
(ई० स० १७०८) के लगभग उसका कुंवर पृथ्वी-
राज्य-प्राप्ति सिंह प्रतापगढ़ राज्य का स्वामी हुआ।
जोधपुर के स्वामी महाराजा अजीतसिंह का एक विवाह महारावत
प्रतापसिंह की विद्यमानता में, महारावत पृथ्वीसिंह की राजकुमारी
(कल्याणकुंवरी ?) से, जबकि उक्त महाराजा का
महारावत की पुत्री का
जोधपुर के महाराजा के जालोर में निवास था, वि० सं० १७५३ (ई० स०
साथ विवाह होना १६६६) में हुआ था¹। महाराजा ने पुनः देवलिया
में जाकर वि० सं० १७६६ चैत्र सुदि १२ (ई० स० १७०६ ता० ११ मार्च)
को महाराजा पृथ्वीसिंह की छोटी राजकुमारी (अनूपकुंवरी ?) से विवाह
किया।
जोधपुर राज्य की ख्यात में इस संबंध में लिखा है कि उन दिनों
अजमेर के सूबेदार शुजा ने महाराजा अजीतसिंह को जोधपुर से अजमेर
बुलवाकर धोखे से मार डालना चाहा। इस कार्य की सफलता के लिए
उसने महाराजा अजीतसिंह के पास समाचार भेजा कि बादशाह ने यह
सूबा मुझसे उतारकर फ़ीरोज़खां के बेटे को दिया है। इसलिए मैं यहां से
अपने घर जाता हूं और फ़ीरोज़खां का बेटा डरकर उज्जैन से आगरे गया
(१) टॉड; राजस्थान; जि० २, पृ० १०१०.।