राजपूताने का इतिहास (मेवाड़ राज्य का इतिहास व वीर गाथाएँ)
History of Rajputana & Mewar by Gaurishankar Ojha
महामहोपाध्याय पं. गौरीशंकर हीराचन्द ओझा द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२४४ प्रतापगढ़ राज्य का इतिहास
और लखणा की लागत देने का उल्लेख है। इस ताम्रपत्र में लेखक का नाम मेहता गोविंद दिया है। ( ९ ) वि० सं० १७९९ आश्विन वदि ३ ( ई० स० १७४२ ता० ६ सितंबर) की पाडलिया लसाण के नाम की सनद, जिसमें चाकरी में उसको गांव थड़ा देने का उल्लेख है। ( १० ) वि० सं० १८०६ माघ वदि ३० ( ई० स० १७५० ता० २६ जनवरी) शुक्रवार की व्यास हरिराम के नाम की सनद, जिसमें नीनोर गांव में बीस बीघा भूमि महोदय अमावस्या के अवसर पर गौतमेश्वर में मंदाकिनी के तट पर दान करने का उल्लेख है। इस सनद में उपर्युक्त अमा- वास्या पर महारावत का दश महादान भी करने का उल्लेख है। यह सनद दोसी रूपजी के हुए होने का उल्लेख है और इसके लेखक का नाम अस्पष्ट है। इसमें महारावत को 'महाराजाधिराज महारावत' लिखा है। ( ११ ) वि० सं० १८१० आश्विन सुदि ७ ( ई० स० १७५३ ता० ३ अक्टोबर) का प्रतापगढ़ में केशवरायजी के मंदिर के पास लगा हुआ शिलालेख, जिसमें वहां के निवासी बोहरों पर भविष्य में किसी प्रकार की सख्ती न होने का उल्लेख है। इस शिलालेख में महारावत को 'महाराज- रावत' लिखा है। ( १२ ) वि० सं० १८११ भाद्रपद वदि ८ ( ई० स० १७५४ ता० ११ अगस्त) का ताम्रपत्र, जिसमें महारावत का अपने कुंवर सालिमसिंह के साथ नाथद्वारे जाकर वहां के गोस्वामी गोवर्धन की गद्दीनशीनी पर गोवर्धनपुर नामक गांव भेंट करने का उल्लेख है। ( १३ ) वि० सं० १८११ मार्गशीर्ष वदि ५ ( ई० स० १७५४ ता० ५ नवंबर) की शाह कपूरचंद पाडलिया के नाम की सनद, जिसमें उसको राज्य- सेवा सौंपने एवं गांव मोहेड़ा तथा गांव देवासला का खिराज हाथ खर्च के लिए दिये जाने तथा आज्ञानुसार राज्य-सेवा करते रहने का उल्लेख है। महारावत गोपालसिंह वीर, नीतिकुशल और धर्मपरायण शासक था। वह अपने पूर्वजों के समान ही परमार्थ के कार्यों में रुचि रखता था।