भारतकोश
राजपूताने का इतिहास (मेवाड़ राज्य का इतिहास व वीर गाथाएँ)

राजपूताने का इतिहास (मेवाड़ राज्य का इतिहास व वीर गाथाएँ)

History of Rajputana & Mewar by Gaurishankar Ojha

महामहोपाध्याय पं. गौरीशंकर हीराचन्द ओझा द्वारा

DevanagariHindipublished534 पृष्ठ

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छठा अध्याय महारावत दलपतसिंह से वर्तमान महारावत सर रामसिंहजी तक

दलपतसिंह
महारावत सामन्तसिंह ने अपने जीवनकाल में ही अपने पौत्र दल-
पतसिंह को, उसके डूंगरपुर गोद चले जाने पर भी, प्रतापगढ़ राज्य का
[राज्य-प्राप्ति] स्वामी बनाना स्थिर कर अंग्रेज़ सरकार की स्वी-
कृति ले ली थी । तदनुसार सामन्तसिंह का
परलोकवास होने के पीछे वि० सं० १९०० पौष सुदि १५ ( ई० स० १८४४
ता० ५ जनवरी ) को वह प्रतापगढ़ राज्य का स्वामी हुआ । उसका जन्म
वि० सं० १८६५ मार्गशीर्ष सुदि ६ ( ई० स० १८०८ ता० २६ नवम्बर )
शनिवार को हुआ था¹ ।
तदनन्तर भारत सरकार की तरफ़ से मेवाड़ का पोलिटिकल एजेंट
कर्नल रॉबिन्सन महारावत की गद्दीनशीनी की खिलअत और गवर्नर जनरल
[अंग्रेज़ सरकार की तरफ़ से गद्दीनशीनी की खिलअत आना] का खरीता लेकर देवलिया गया । वहां उसने
एक दरबार में महारावत को गवर्नर जनरल का
खरीता देकर खिलअत में चांदी के हौदे-सहित
हथिनी, चांदी के ज़ेवर-सहित घोड़ा, मोतियों की
माला, सरपेच, मंदील, शाल जोड़ा, चुगा, शाली, रूमाल, परतले-सहित
तलवार, दुनाली बंदूक, तमंचे की जोड़ी, गोशवारा आदि दिये² ।
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( १ ) देखो; ऊपर पृ० २६३ ।
( २ ) वीरविनोद; द्वितीय भाग, पृ० १०६६ ।
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