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राजपूताने का इतिहास (मेवाड़ राज्य का इतिहास व वीर गाथाएँ)

राजपूताने का इतिहास (मेवाड़ राज्य का इतिहास व वीर गाथाएँ)

History of Rajputana & Mewar by Gaurishankar Ojha

महामहोपाध्याय पं. गौरीशंकर हीराचन्द ओझा द्वारा

DevanagariHindipublished534 पृष्ठ

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भूगोल सम्बन्धी वर्णन ३ (३) ऐरा—राजधानी प्रतापगढ़ के पास से निकलकर १५ मील दक्षिण-पश्चिम में बहती हुई यह बांसवाड़ा राज्य में प्रवेश करती है और वहां से तीस मील बहकर मही में मिल जाती है। (४) रेतम—क़सबा प्रतापगढ़ से निकलकर राज्य के उत्तर-पूर्व में बहती हुई ग्वालियर राज्य में जाकर यह चंबल में मिल जाती है। (५) करमोई—इस नदी का निकास सीतामाता की पहाड़ियों से हुआ है। मेवाड़ में धरियावद के पास बहती हुई यह मही में जा मिलती है। इस राज्य में कोई बड़ी उल्लेखनीय झील नहीं है। राज्य में छोटे-बड़े सब मिलाकर ३१ तालाब हैं, जिनमें रायपुर, गंधेर, खेरोट, घोटार्सो, अचल्ल- झीलें पुर, जाजली, अचलावदा, साखथली और देवलिया का 'तेजसागर' तालाब मुख्य हैं। तेजसागर तालाब महारावत तेजसिंह का बनवाया हुआ है। इस राज्य का जल-वायु मालवा के समान है और सामान्यतः आरोग्यप्रद है। मई-जून और अक्टूबर मास में सर्वत्र विशेष गर्मी पड़ती जल-वायु और वर्षा है, किंतु मगरा ज़िले में पहाड़ियां होने से अन्य स्थानों की अपेक्षा गर्मी कम रहती है। शीतकाल में सर्दी अधिक पड़ती है। यहां वर्षा का औसत २५ इंच के क़रीब है। ई० स० १८६३ (वि० सं० १६५०) में यहां ६४ इंच वर्षा हुई थी और ई० स० १८६६ (वि० सं० १६५६) में ११ इंच से भी कम। पहाड़ी प्रदेश को छोड़कर यहां की अधिकांश भूमि उपजाऊ है। मिट्टी काली, भूरी और धामनी है। मगरा ज़िले की भूमि कंकरीली है। ज़मीन और पैदावार काली मिट्टीवाली अर्थात् 'माळ' की भूमि अधिक उपजाऊ है। यहां खरीफ़ (सियालू) और रबी (उन्हालू) दोनों फ़सलें होती हैं, परंतु रबी की फ़सल की अपेक्षा खरीफ़ की फ़सल अधिक होती है। जहां कुओं आदि से सिंचाई की सुविधा है, वहां तथा 'माळ' में रबी की फ़सल पैदा की जाती है।