राजपूताने का इतिहास (मेवाड़ राज्य का इतिहास व वीर गाथाएँ)
History of Rajputana & Mewar by Gaurishankar Ojha
महामहोपाध्याय पं. गौरीशंकर हीराचन्द ओझा द्वारा
पृष्ठ 35, कुल 534 में से
संदर्भ में पढ़ें२ प्रतापगढ़ राज्य का इतिहास इस राज्य के उत्तर में उदयपुर और ग्वालियर राज्य; पश्चिम में उदयपुर और बांसवाड़ा राज्य; दक्षिण में रतलाम और जावरा राज्य एवं पूर्व में ग्वालियर, जावरा तथा इंदौर राज्य के कुछ- सीमा कुछ अंश हैं। उत्तर से दक्षिण तक इस राज्य की अधिक से अधिक लंबाई ५० मील है। पूर्व से पश्चिम तक का उत्तर का आधा भाग चौड़ा है, जिसकी चौड़ाई ३० मील है, परंतु दक्षिणी आधे विभाग की चौड़ाई कम है और कहीं-कहीं तो केवल ८ मील ही है। प्रतापगढ़ राज्य का उत्तरी तथा उत्तर-पश्चिम का अनुमान एक तिहाई हिस्सा, जो 'मगरे' के नाम से प्रसिद्ध है, पर्वत श्रेणियों से भरा पर्वत श्रेणियां हुआ है। उत्तरी विभाग में सबसे ऊंची पहाड़ी समुद्र की सतह से १८४२ फुट ऊंची है। दक्षिणी विभाग में सबसे ऊंची पहाड़ी समुद्र की सतह से १६१० फुट है, जो कानगढ़ के समीप है। शेष भूमि अर्थात् राज्य का पश्चिमी विभाग मालवा के पठार के समान है, जो समुद्र की सतह से १६५० से १७०० फुट तक ऊंचा है और माल की ज़मीन होने से बड़ा उपजाऊ है। इस राज्य में जाकम (जाखम), शिव, ऐरा, रेतम और करमोई नदियां नामक नदियां हैं। उनमें जाकम (जाखम) और शिव साल भर बहती हैं, बाक़ी कुछ मास तक ही। (१) जाकम (जाखम)—यह नदी इंदौर राज्य के जाखमियां गांव से निकलकर कुछ दूर मेवाड़ में बहती हुई मेवाड़ से दक्षिण-पश्चिम में इस राज्य में प्रवेशकर मगरा ज़िले के उत्तरी भाग में बहती हुई पुनः मेवाड़ में प्रवेश करती है। तत्पश्चात् धरियावद के पास होती हुई यह मही की सहायक नदी सोम में जा मिलती है। (२) शिव—इस नदी का उद्गम इसी राज्य के दक्षिणी भाग में शिवना गांव से हुआ है। कुछ मील प्रतापगढ़ राज्य में बहकर पूर्व में २३ मील तक इस राज्य की सीमा बनाती हुई यह उत्तर-पूर्व में मंदसोर के पास बहकर चंबल में जा गिरती है।