राजपूताने का इतिहास (मेवाड़ राज्य का इतिहास व वीर गाथाएँ)
History of Rajputana & Mewar by Gaurishankar Ojha
महामहोपाध्याय पं. गौरीशंकर हीराचन्द ओझा द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंमहारावत उदयसिंह २६७ महारावल जसवन्तसिंह (दूसरा) के दत्तक रखने के सम्बन्ध में वहां बखेड़ा होकर हिम्मतसिंह क़ैद किया गया। उसके प्रति भी महारावत ने अपने शासन-काल में सौजन्य दिखलाकर उसको मुक्तकर उसकी जागीर पीछी उसे दे दी, जो उसकी उदार नीति का परिचय देती है। उसकी एक राणी लालकुंवरी ने वृन्दावन में राधावल्लभ का मन्दिर बनवाया था। उदयसिंह महारावत उदयसिंह का जन्म वि० सं० १९०५ आषाढ वदि १३ (ई० स० १८४८ ता० २६ जून) को हुआ था और वह वि० सं० १९२० चैत्र वदि ७ (ई० स० १८६४ ता० ३० मार्च) को जन्म, गद्दीनशीनी और अपने पिता के पीछे प्रतापगढ़ राज्य का स्वामी पुत्र-जन्म हुआ। उस (उदयसिंह) का प्रथम विवाह भूतपूर्व महारावत दलपतसिंह की विद्यमानता में नामली (रतलाम राज्य) के ठाकुर तख़्तसिंह की पुत्री सरूपकुंवरी से हुआ था, जिसके उदर से कुछ समय बाद ही वि० सं० १९२२ ज्येष्ठ सुदि ५ (ई०स० १८६५ ता० २६ मई) सोमवार को उसके महाराजकुमार हम्मीरसिंह का जन्म हुआ, परंतु पांच वर्ष का होकर उक्त राजकुमार वि० सं० १९२६ (ई० स० १८६६) में काल-कवलित हो गया। राज्यारोहण के समय महारावत की आयु केवल सोलह वर्ष की थी, इसलिए मेवाड़ के पोलिटिकल एजेंट कर्नल ईडन ने राजपूताना के एजेंट गवर्नर जेनरल की स्वीकृति से भूतपूर्व महा- शासन-कार्य चलाने के संबंध में महारावत के नाम पोलिटि- कल एजेंट का खरीता जाना रावत दलपतसिंह की इच्छा के अनुसार शाह जोधकरण पाडलिया और पंडित आपा की सलाह से शासन-कार्य चलाने के लिए महारावत के नाम खरीता भेजा और उन दोनों को भी वि० सं० १९२१ आषाढ सुदि ४ (ई० स० १८६४ ता० ६ जुलाई) को पत्र भेज इसकी सूचना दी¹। (१) कर्नल ईडन का शाह जोधकरण और पंडित आपा के नाम का वि० सं० १९२१ आषाढ सुदि ४ (ई० स० १८६४ ता० ६ जुलाई) का पत्र। ३८