राजपूताने का इतिहास (मेवाड़ राज्य का इतिहास व वीर गाथाएँ)
History of Rajputana & Mewar by Gaurishankar Ojha
महामहोपाध्याय पं. गौरीशंकर हीराचन्द ओझा द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंमहारावत रघुनाथसिंह ३१६ पंडित मोहनलाल पंड्या का कामदार नियत होना दीवानी अदालत का हाकिम रह चुका था, अपना कामदार नियत किया। वह नवीन शैली की कार्य-प्रणाली का अच्छा परिचय रखता था, इसलिए शासन-शैली में बहुत कुछ फेर-फार होकर उसके कार्यकाल में कई लोकोपयोगी कार्यों की नींव दी गई। महारावत ने, जो स्वयं लोकोप- योगी कार्यों में अनुराग रखता था और व्यवस्थित रूप से शासन प्रणाली को चलाना चाहता था, ऐसे कार्यों में बड़ी रुचि दिखलाई, जिससे शीघ्र ही वहां कई आवश्यक कार्य हुए, जिनका उल्लेख नीचे किया गया है। राजधानी प्रतापगढ़ में महारावत उदयसिंह के समय ही अस्पताल की स्थापना हो गई थी, परंतु उसका निजी कोई भवन नहीं था; रघुनाथ हॉस्पिटल का निर्माण होना अतएव महारावत ने राजधानी प्रतापगढ़ में क़िले के बाहर अस्पताल के लिए वि० सं० १९५० (ई० स० १८९३) में नवीन भवन बनवाकर उसका उद्घाटन राजपूताना के एजेंट गवर्नर-जेनरल कर्नल ट्रेवर के हाथ से कर- वाया और उसका नाम 'रघुनाथ हॉस्पिटल' रखा तथा रोगियों के इलाज की अच्छी व्यवस्था कर अशक्त रोगियों के लिए वहां ही रहकर चिकित्सा करवाने का यथोचित प्रबंध करवा दिया। देवलिया में चिकित्सा का कुछ भी साधन न था, जिससे वहां के निवासी बीमारी के समय पूर्ण कष्ट का अनुभव करते थे। वि० सं० १९५२ (ई० स० १८९५) में महारावत ने वहां भी चिकित्सालय स्थापित करवा दिया। प्रतापगढ़ में सफ़ाई, रोशनी आदि का कोई प्रबन्ध न होने से म्युनिसिपल कमेटी की स्थापना वि० सं० १९५० (ई० स० १८९३) में वहां पर म्युनिसिपल कमेटी की स्थापना हुई, जिससे वहां सफ़ाई, रोशनी आदि का समुचित प्रबन्ध हो गया। सायर की लागत, पहले ठेके पर दी जाकर ठेकेदारों द्वारा वसूल होती थी, जिससे आय पूरी नहीं होती थी और व्यापारियों आदि को कष्ट