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राजपूताने का इतिहास (मेवाड़ राज्य का इतिहास व वीर गाथाएँ)

राजपूताने का इतिहास (मेवाड़ राज्य का इतिहास व वीर गाथाएँ)

History of Rajputana & Mewar by Gaurishankar Ojha

महामहोपाध्याय पं. गौरीशंकर हीराचन्द ओझा द्वारा

DevanagariHindipublished534 पृष्ठ

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३३६ प्रतापगढ़ राज्य का इतिहास वि० सं० १६६७ आश्विन सुदि ४ (ई० स० १६१० ता० ७ अक्टोबर) को महाराजकुमार की शेखावत कुंवराणी के उदर से महारावत के द्वितीय पौत्र का जन्म हुआ । उस अवसर पर महाराजकुमार की बनाई योजना के अनुसार महारावत ने अपने राज्य के चारण-भाटों, ब्राह्मणों तथा साधुओं से नज़राना लेने की प्रथा उठा दी, परंतु थोड़े ही दिनों बाद उक्त शिशु का देहांत हो गया । उसी वर्ष आश्विन सुदि ६ ( ता० १३ अक्टोबर ) को महाराजकुमार मानसिंह का दूसरा विवाह टेहरी गढ़वाल के पंवार (परमार) राजा कीर्ति- शाह की राजकुमारी भुवनेश्वरीदेवी से हुआ, जिसके उदर से वि० सं० १६६८ श्रावण वदि १४ ( ई० स० १६११ ता० २४ जुलाई ) को राजकुमारी मोहनकुंवरी का जन्म हुआ । वि० सं० १६६७ ( ई० स० १६१०) में सम्राट् एडवर्ड सप्तम का लंदन में देहावसान हो जाने पर प्रिंस जॉर्ज, सम्राट् जॉर्ज पञ्चम के नाम से सिंहासनारूढ़ हुआ । इस उपलक्ष्य में उक्त सम्राट् ने सम्राज्ञी-सहित वि० सं० १६६८ ( ई० स० १६११ ) में भारत आकर दिल्ली नगर में राज्या- भिषेकोत्सव का ता० १२ दिसंबर (पौष वदि ७) को बृहत् दरबार करना निश्चित किया । इस अवसर पर उक्त दरबार में सम्मिलित होने के लिए भारत के समस्त देशी नरेशों और प्रतिष्ठित पुरुषों के नाम तत्कालीन वाइसरॉय लॉर्ड हार्डिंज की तरफ़ से निमन्त्रण पत्र भेजे गये । प्रतापगढ़ में भी वाइस- रॉय का निमन्त्रण पत्र पहुंचने पर महारावत की तरफ़ से महाराजकुमार मानसिंह ने कुछ सरदारों-सहित दिल्ली जाकर दरबार में सम्मिलित होने और सम्राट् से साक्षात्कार करने का सम्मान प्राप्त किया तथा वाइसरॉय लॉर्ड हार्डिंज से भी उसकी मुलाक़ात हुई । दिल्ली दरबार में महारावत सम्मिलित नहीं हुआ, तो भी सम्राट् की तरफ़ से इसके उपलक्ष्य में उसको के० सी० आई० ई० (नाइट कमांडर ऑव् दि इंडियन एम्पायर ) की सम्माननीय उपाधि दिये जाने की भारत सरकार की ओर से सूचना प्रकाशित हुई ।