भारतकोश
राजपूताने का इतिहास (मेवाड़ राज्य का इतिहास व वीर गाथाएँ)

राजपूताने का इतिहास (मेवाड़ राज्य का इतिहास व वीर गाथाएँ)

History of Rajputana & Mewar by Gaurishankar Ojha

महामहोपाध्याय पं. गौरीशंकर हीराचन्द ओझा द्वारा

DevanagariHindipublished534 पृष्ठ

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महारावत रघुनाथसिंह ३३७

इसके पीछे वि० सं० १९६६ (ई० स० १९१२) के नवंबर में भारत का वाइसरॉय और गवर्नर-जनरल लॉर्ड हार्डिंज राजपूताने के राज्यों में भ्रमण करता हुआ अजमेर पहुंचा । उसने महारावत को भी वहां आने के लिए निमंत्रित किया । इसपर महाराजकुमार मानसिंह और कुछ सरदारों तथा राजकर्मचारियों के साथ महारावत अजमेर गया । रेल्वे स्टेशन पर अजमेर-मेरवाड़ा के कमिश्नर आदि प्रतिष्ठित व्यक्तियों ने उसका स्वागत किया । फिर वाइसरॉय के आगमन के समय महारावत रेल्वे स्टेशन पर सरकारी अफ़सरों और रईसों के साथ स्वागत-समारोह में शरीक हुआ । अनन्तर वह महाराजकुमार तथा सरदारों आदि के साथ रेज़िडेंसी हाउस में वाइसरॉय से मुलाक़ात करने गया । वाइसरॉय ने भी वापसी की मुलाक़ात के लिए महारावत के निवास-स्थान बीकानेर हाउस (मेयो कॉलेज, अजमेर) में जाकर महारावत को के० सी० आई० ई० के तमग़े से विभूषित किया । अजमेर में रहते समय महारावत की डूंगरपुर के स्वर्गीय महारावत विजयसिंह और शाहपुरा के राजाधिराज सर नाहर- सिंह से भी मुलाक़ातें हुईं । इस अवसर पर महारावत मेयो कॉलेज के पारितोषिक-वितरणोत्सव, किंग एडवर्ड मेमोरियल के शिलान्यासोत्सव, गार्डन पार्टी आदि में भी सम्मिलित हुआ था । उसी वर्ष महाराजकुमार मानसिंह का तृतीय विवाह ध्रांगधरा- (काठियावाड़) के स्वर्गीय महाराजराणा अजीतसिंह की राजकुमारी और वर्तमान महाराजराणा घनश्यामसिंहजी की बहिन मयाकुंवरीबा से हुआ । महारावत को राज्यासन पर बैठे हुए वि० सं० १९७१ (ई० स० १९१४) के मई मास में चौबीस वर्ष समाप्त होकर पच्चीसवां आरंभ हुआ । महाराजकुमार के आग्रह से इस अवसर पर वहां रौप्य जयंती मनाना स्थिर होकर ता० १२ मई (वि० सं० १९७१ ज्येष्ठ वदि ३) को दरबार हुआ, जिसमें महारावत के समय के उल्लेखनीय कार्यों का वर्णन किया गया । उस समय महारावत ने कितने ही व्यक्तियों की तनख्वाहों तथा जागीरों में वृद्धि ४३