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राजपूताने का इतिहास (मेवाड़ राज्य का इतिहास व वीर गाथाएँ)

राजपूताने का इतिहास (मेवाड़ राज्य का इतिहास व वीर गाथाएँ)

History of Rajputana & Mewar by Gaurishankar Ojha

महामहोपाध्याय पं. गौरीशंकर हीराचन्द ओझा द्वारा

DevanagariHindipublished534 पृष्ठ

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३५० प्रतापगढ़ राज्य का इतिहास महारावत सर रामसिंहजी महारावत सर रामसिंहजी बहादुर, के० सी० एस० आई० का जन्म वि० सं० १६६५ चैत्र सुदि १२ (ई० स० १६०८ ता० १२ अप्रेल) रविवार जन्म और गद्दीनशीनी को महाराजकुमार मानसिंह की कुंवराणी शेखावत चांदकुंवरी के उदर से खेतड़ी में हुआ और वि० सं० १६८५ पौष सुदि ८ (ई० स० १६२६ ता० १८ जनवरी) को ये अपने पितामह महारावत रघुनाथसिंह का देहावसान होने पर प्रतापगढ़ राज्य के स्वामी हुए। बाल्यकाल समाप्त होने पर योग्य पुरुषों के निरीक्षण में इनकी प्रारंभिक शिक्षा प्रतापगढ़ में ही हुई। इसी बीच इनके पिता महाराजकुमार मानसिंह का परलोकवास हो गया तथापि इनके शिक्षा शिक्षण में किसी प्रकार का अन्तर नहीं पड़ा और ये वि० सं० १६७६ के मार्गशीर्ष (ई० स० १६१६ नवंबर) मास में उच्च शिक्षा के लिए अजमेर के मेयो कॉलेज में भेजे गये। उस समय इनका शिक्षक मौलवी सय्यद ग़फ़्फ़ार और अभिभावक सी० सी० एच० डुइस नामक अंग्रेज़ बनाये गये, जिनकी देख-रेख में इनको अपनी बुद्धि के विकास का अच्छा अवसर मिला। वि० सं० १६७६ से १६८५ (ई० स० १६१६ से १६२८) तक इन्होंने वहां विद्याध्ययन किया और वहां की सर्वोच्च परीक्षा पोस्ट-डिप्लोमा को पास करने की भी इनकी इच्छा थी, परन्तु अपने पितामह महारावत रघुनाथसिंह का शरीर अस्वस्थ रहने और फिर उसका स्वर्गवास हो जाने के कारण राजकार्य का बोझ आ पड़ने से इन्हें अपना वह विचार छोड़ना पड़ा। प्रखर-बुद्धि और प्रतिभाशाली होने के कारण अपने अध्ययनकाल में ये प्रत्येक कक्षा में सदा प्रथम रहा करते थे, जिससे इनको कई पुरस्कार भी मिले, जिसका श्रेय इनके शिक्षक मिस्टर एफ़० ए० लेस्ली जोन्स आदि को है। सिंहासनासीन होने के समय इनकी आयु इक्कीस वर्ष के ऊपर हो गई थी, अतएव अंग्रेज़ सरकार को उस समय वहां रीजेंसी कौंसिल बनाने