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राजपूताने का इतिहास (मेवाड़ राज्य का इतिहास व वीर गाथाएँ)

राजपूताने का इतिहास (मेवाड़ राज्य का इतिहास व वीर गाथाएँ)

History of Rajputana & Mewar by Gaurishankar Ojha

महामहोपाध्याय पं. गौरीशंकर हीराचन्द ओझा द्वारा

DevanagariHindipublished534 पृष्ठ

पृष्ठ 420, कुल 534 में से

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'महारावत रामसिंह ३५१ अंग्रेज़ सरकार की तरफ़ से गद्दीनशीनी की ख़िलअत प्राप्त होना की आवश्यकता नहीं हुई। फिर अंग्रेज़ सरकार की तरफ़ से राजपूताने का स्थानापन्न एजेंट गवर्नर- जेनरल मिस्टर ए० एन० एल० केटर तथा दक्षिणी राजपूताने का पोलिटिकल एजेन्ट लेफ़्टनेंट कर्नल डी० एम्० फ़ील्ड आदि प्रतापगढ़ गये और वि० सं० १६८६ वैशाख सुदि ६ (ई० स० १६२६ ता० १४ मई) को एक बड़े दरबार में उन्होंने महारावत के सम्मुख वाइस- रॉय लॉर्ड इर्विन का ता० २० मार्च (वि० सं० १६८५ फाल्गुन सुदि १०) का खरीता पढ़ सुनाया एवं उसे गद्दीनशीनी की ख़िलअत प्रदान की। तदनंतर महारावत ने शासन-कार्य चलाने के लिए मिस्टर एफ० सी० केवेन्टरी नामक अंग्रेज़ मंत्री नियत किया मंत्री-पद पर एफ० सी० केवेन्टरी की नियुक्ति और उसके परामर्श के अनुसार शासन-कार्य चलाने लगे, परन्तु शासन-शैली पूर्व निर्दिष्ट ही रखी। उसी वर्ष मगशीर्ष सुदि १ (ई० स० १६२६ ता० २ दिसम्बर) को इन्होंने अपनी छोटी बहिन राजकुमारी मोहनकुंवरी का विवाह सीतामऊ-नरेश राजा सर रामसिंहजी के ज्येष्ठ राजकुमार डॉ० राजकुमारी मोहनकुंवरी का विवाह रघुवीरसिंह, एम्० ए०, एल्-एल्० बी०, डी० लिट्०१ के साथ किया। (१) राजपूताना तथा सेंट्रल इंडिया के वर्तमान राजकुमारों में सीतामऊ के सुयोग्य महाराजकुमार डॉ० रघुवीरसिंह का विद्याभिरुचि के कारण सर्वोच्च स्थान है। खोज और अन्वेषण के कार्यों से उसको अत्यन्त अनुराग है और वह निरन्तर इन कार्यों में व्यस्त रहता है। उसने थोड़े ही समय में अपने गंभीर अध्ययन द्वारा साक्षर वर्ग में पूर्ण ख्याति प्राप्त की है। समय-समय पर उसके कई निवन्ध सामयिक पत्र-पत्रिकाओं में प्रका- शित होते रहते हैं। इतिहास उसका प्रिय विषय है और उसकी रचनाओं में 'मालवा में युगान्तर' नामक पुस्तक वहां के इतिहास पर नूतन प्रकाश डालती है। उसके बृहत् पुस्तकालय में अनेक अप्राप्य ऐतिहासिक ग्रन्थ, मुग़लकाल के हिंदी, फ़ारसी और उर्दू भाषा के पत्र-पत्रादि विद्यमान हैं, जिनका उसने पूर्ण परिश्रम से और अगाध द्रव्य व्यय कर संग्रह किया है। जयपुर राज्य से प्राप्त मुग़ल-काल के अख़बारों का बृहत् संग्रह भी उसने अपने यहां एकत्रित कर लिया है, जो उस समय के इतिहास के लिए

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