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राजपूताने का इतिहास (मेवाड़ राज्य का इतिहास व वीर गाथाएँ)

राजपूताने का इतिहास (मेवाड़ राज्य का इतिहास व वीर गाथाएँ)

History of Rajputana & Mewar by Gaurishankar Ojha

महामहोपाध्याय पं. गौरीशंकर हीराचन्द ओझा द्वारा

DevanagariHindipublished534 पृष्ठ

पृष्ठ 421, कुल 534 में से

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३५२ प्रतापगढ़ राज्य का इतिहास शासन-सूत्र हाथ में लेने के पीछे प्रतापगढ़ राज्य में इनके द्वारा कई लोक-हितकारी कार्य हुए। राज्य में शिक्षा की वृद्धि के लिए प्रताप- लोक-हितकारी कार्य गढ़ के "पिन्हे नोवल्स स्कूल" को हाई स्कूल के रूप में परिवर्तित कर सर्व साधारण की उच्च शिक्षा- प्राप्ति का सुलभ साधन कर दिया गया है और हाई स्कूल में विज्ञान की शिक्षा देने की व्यवस्था कर उसमें दो नवीन भवन बनवाकर इमारत भी बढ़ा दी गई है। प्रारंभिक शिक्षा के लिए वहां पृथक् प्राइमरी स्कूल स्थापित हो गया है। गांवों में कई स्थलों पर नवीन पाठशालाएं खोली जाकर ग्रामीण जनता को शिक्षा का लाभ उठाने का पूरा अवसर दिया गया है। राजधानी प्रतागढ़ में अपनी विमाता मयाकुंवरी द्वारा निर्मित "मानसिंह कन्या पाठशाला" की भी इनके समय में पूरी उन्नति हुई है। प्रतापगढ़ की कन्या-पाठशाला में शिक्षा प्राप्त करनेवाली राजपूत बालि- काओं के लिए उसके पिछले भाग में एक बोर्डिंग हाउस भी बना दिया गया है। स्त्रियों की चिकित्सा के लिए वहां पर कोई ख़ास प्रबन्ध न होने से इन्होंने अपनी विमाता भुवनेश्वरीदेवी के नाम पर "श्रीभुवनेश्वरीदेवी ज़नाना अस्पताल" बनवा दिया है। ग्रामीण प्रजा की चिकित्सा के लिए ट्रेवेलिंग वैद्य नियत कर दिये गये हैं, जो गांव-गांव जाकर पीड़ितों को मुफ़्त औषध बांटते हैं। गांवों की जनता के हित की दृष्टि से वहां पंचायतों की स्थापना कर ग्राम-सुधार का कार्य आरंभ किया गया है। कृषि की उन्नति के लिए कृषि का महकमा स्थापित कर मुफ़्त बीज देने की व्यवस्था उपयोगी है और उससे तत्कालीन राजनैतिक परिस्थिति पर भी पूरा प्रकाश पड़ेगा। वह बड़ा सरल और निरभिमानी पुरुष है। साक्षर वर्ग के लिए उसके यहां जाकर अध्ययन करने का मार्ग खुला हुआ है। प्रतापगढ़ राज्य के इस इतिहास की रचना के समय मुझे उक्त महाराजकुमार से मुग़ल-काल के कुछ अख़बारों का खुलासा प्राप्त हुआ है। आशा है कि उसकी सर्वतोमुखी प्रतिभा और लगन से भविष्य में ऐतिहासिक जगत् को बहुत कुछ लाभ होगा। उसके उपर्युक्त प्रतापगढ़ की राजकुमारी मोहनकुंवरी के उदर से एक पुत्र और दो कन्याएं उत्पन्न हुई हैं।

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