राजपूताने का इतिहास (मेवाड़ राज्य का इतिहास व वीर गाथाएँ)
History of Rajputana & Mewar by Gaurishankar Ojha
महामहोपाध्याय पं. गौरीशंकर हीराचन्द ओझा द्वारा
पृष्ठ 424, कुल 534 में से
संदर्भ में पढ़ेंमहारावत रामसिंहजी ३५३ की गई है। कई वर्षों से किसानों पर माल हासिल का ऋण चढ़ा हुआ था, जिसे चुकाने में वे असमर्थ थे। वि० सं० १६६४ (ई०स० १६३७) में इन्होंने सब पुराना बक़ाया माफ़ कर दिया। लोगों को नागरिकता के अधिकार देने के लिए प्रतापगढ़ की म्युनिसिपेलिटी में चुने हुए मेंबर लेने की भी महा- रावत के राज्य-काल में व्यवस्था हो गई है। बेगार लेना इन्होंने अपने राज्य में बंद कर दिया है। गमनागमन की कठिनाइयों को मिटाने के लिए महा- रावतजी ने अपने राज्य में मोटरें चलने लायक़ मार्ग बनवा दिये हैं, जिससे ग्रामीण जनता को अकाल के समय खाद्य पदार्थ सुगमतापूर्वक मिलने का साधन हो गया है। व्यापार की वृद्धि के लिए इन्होंने अपने राज्य से वागड़ में जानेवाले माल का दाण (चुंगी, कर) लौटाने की आज्ञा दे दी है। महा- रावत को उद्योग और धंधों की वृद्धि करने का चाव है। प्रतापगढ़ में जिनिंग फ़ैक्टरी स्थापित हो गई है और बिजली की रोशनी पहुंचाने का भी आयोजन हो गया है। न्याय-विभाग में राजसभा के अतिरिक्त हाई कोर्ट और बना दिया गया है, जिसमें सेशन जज के ऊपर के तमाम मुक़दमे सुने जाते हैं और नीचे की अदालतों की अपील भी वहीं होती है। राज्य के पुराने मुलाज़िमों को पेंशन देने का नियम न था, परंतु महारावतजी ने उनकी सेवाओं आदि को देख योग्यता के अनुसार पेंशन देने का भी सिलसिला जारी किया है। शिक्षा-विभाग में शिक्षकों के लिए प्रॉविडेन्ड फंड क़ायम कर दिया गया है। इन्होंने नवरात्रि पर होनेवाली जीव-हिंसा और होली के अवसर पर होनेवाले अहेड़े के शिकार को रोककर अहिंसा-प्रेम का परिचय दिया है। हिंदी भाषा के प्रति प्रेम होने से महारावत ने राज-भाषा हिंदी ही रक्खी है। अंग्रेज़ सरकार के साथ महारावत का अच्छा व्यवहार है। इस राज्य की ओर से अंग्रेज़-सरकार को खिराज की जो रक़म दी जाती थी, वह खिराज में कमी होना अधिक होने से उक्त सरकार ने उसमें पांच प्रति- शत कमी कर दी है और कैश कंट्रीब्यूशन के ४५