राजपूताने का इतिहास (मेवाड़ राज्य का इतिहास व वीर गाथाएँ)
History of Rajputana & Mewar by Gaurishankar Ojha
महामहोपाध्याय पं. गौरीशंकर हीराचन्द ओझा द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें३६६ प्रतापगढ़ राज्य का इतिहास हुआ, जो महारावत प्रतापसिंह का समकालीन था । उसका पुत्र केसरीसिंह पिता की विद्यमानता में ही मर गया, इसलिए केसरीसिंह का पुत्र फ़तहसिंह अपने दादा (रणछोड़दास) का उत्तराधिकारी हुआ । फिर उसका पौत्र हरिसिंह (भगवंतसिंह का पुत्र) कल्याणपुरा का ठाकुर हुआ । हरिसिंह के चिमनसिंह तथा पहाड़सिंह नामक दो पुत्र थे, जो क्रमशः कल्याणपुरा के स्वामी हुए । पहाड़सिंह का पुत्र लालसिंह और उस- (लालसिंह) का तख़्तसिंह हुआ । तत्पश्चात् देवीसिंह वहां का स्वामी हुआ, जिसकी वि० सं० १६८१ चैत्र सुदि १४ (ई० स० १६२५ ता० १८ अप्रेल) को मृत्यु होने पर उसका पुत्र संग्रामसिंह कल्याणपुरा का स्वामी हुआ, जो वहां का वर्तमान ठाकुर है । आंवीरामा आंवीरामा के ठाकुर, महारावत बाघसिंह के छोटे पुत्र ख़ान के वंशधर हैं और उनकी उपाधि "ठाकुर" है । ख़ान का पुत्र दुर्गादास और उस (दुर्गादास) का सबलसिंह हुआ, जिसको महारावत सिंहा के समय आंवीरामा जागीर में दिया गया । सबलसिंह का पुत्र गोपीनाथ हुआ, जिसके पीछे चंद्रसिंह, पृथ्वीसिंह, खुम्माणसिंह एवं अखैराज क्रमशः आंवीरामा के स्वामी हुए । अखैराज का पुत्र कुशलसिंह हुआ, जिसका पुत्र केसरीसिंह पिता की विद्यमानता में महारावत उदयसिंह के समय बोरी-राँछड़ी के सीमा-संबंधी झगड़े में बांसवाड़ा राज्य की तरफ़ से आक्रमण होने पर लड़कर मारा गया । तब उस (केसरीसिंह) का पुत्र विभूतिसिंह अपने दादा का उत्तराधिकारी हुआ । विभूतिसिंह का पुत्र शंभुसिंह आंवीरामा का वर्तमान सरदार है । ( १ ) वंशक्रम—[ १ ] ख़ान [ २ ] दुर्गादास [ ३ ] सबलसिंह [ ४ ] गोपी- नाथ [ ५ ] चन्द्रसिंह [ ६ ] पृथ्वीसिंह [ ७ ] खुम्माणसिंह [ ८ ] अखैराज [ ६ ] कुशलसिंह [ १० ] विभूतिसिंह और [ ११ ] शंभुसिंह ।