भारतकोश
राजपूताने का इतिहास (मेवाड़ राज्य का इतिहास व वीर गाथाएँ)

राजपूताने का इतिहास (मेवाड़ राज्य का इतिहास व वीर गाथाएँ)

History of Rajputana & Mewar by Gaurishankar Ojha

महामहोपाध्याय पं. गौरीशंकर हीराचन्द ओझा द्वारा

DevanagariHindipublished534 पृष्ठ

पृष्ठ 467, कुल 534 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 467

३६६ प्रतापगढ़ राज्य का इतिहास ३२ विक्रमसिंह ३३ रणसिंह ( कर्णसिंह )। | मेवाड़ की रावल शाखा सीसोदे की राणा शाखा ३४ क्षेमसिंह १ माहप २ राहप ३५ सामंतसिंह ३६ कुमारसिंह ३ नरपति [नोट: पहले मेवाड़ का स्वामी हुआ फिर वागड़ की तरफ जाकर डूंगरपुर-बांसवाड़ा राज्य की स्थापना की।] ३७ मथनसिंह ४ दिनकरण ३८ पद्मसिंह ५ जसकरण ३९ जैत्रसिंह वि० सं० १२७०-१३०६ ६ नागपाल ४० तेजसिंह वि० सं० १३१७-२४ ७ पूर्णपाल ४१ समरसिंह वि० सं० १३३०-५८ ८ पृथ्वीमल्ल ४२ रत्नसिंह वि० सं० १३५६-६० ९ भुवनसिंह अलाउद्दीन ख़िलजी का चित्तोड़ पर आक्रमण १० भीमासिंह होने पर वि० सं० १३६० में परलोक ११ जयसिंह सिधारा और चित्तोड़ पर मुसलमानों का अधिकार हुआ। १२ लखमणसीसिंह | वि. सं. १३६० अरिसिंह १३ अजयसिंह [नोट: इसके वंशजों ने मेवाड़ से बाहर जाकर दक्षिण में राज्य-स्थापना की।] ४३ हमीरसह वि० सं० १३८२ (?)-१४२१ (?) | मुसलमानों से चित्तोड़ लिया ४४ क्षेत्रसिंह ( खेता ) वि० सं० १४२१ (?)-१४३६ ४५ लक्षसिंह ( लाखा ) वि० सं० १४३६-१४७८ (?) ४६ मोकल वि० सं० १४७८ (?)-१४९० ४७ कुंभकर्ण ( कुंभा ) वि० सं० १४९०-१५२५ मेवाड़ का स्वामी क्षेमकर्ण ( खींवा ) प्रतापगढ़वालों का पूर्वज