राजपूताने का इतिहास (मेवाड़ राज्य का इतिहास व वीर गाथाएँ)
History of Rajputana & Mewar by Gaurishankar Ojha
महामहोपाध्याय पं. गौरीशंकर हीराचन्द ओझा द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें३६६ प्रतापगढ़ राज्य का इतिहास ३२ विक्रमसिंह ३३ रणसिंह ( कर्णसिंह )। | मेवाड़ की रावल शाखा सीसोदे की राणा शाखा ३४ क्षेमसिंह १ माहप २ राहप ३५ सामंतसिंह ३६ कुमारसिंह ३ नरपति [नोट: पहले मेवाड़ का स्वामी हुआ फिर वागड़ की तरफ जाकर डूंगरपुर-बांसवाड़ा राज्य की स्थापना की।] ३७ मथनसिंह ४ दिनकरण ३८ पद्मसिंह ५ जसकरण ३९ जैत्रसिंह वि० सं० १२७०-१३०६ ६ नागपाल ४० तेजसिंह वि० सं० १३१७-२४ ७ पूर्णपाल ४१ समरसिंह वि० सं० १३३०-५८ ८ पृथ्वीमल्ल ४२ रत्नसिंह वि० सं० १३५६-६० ९ भुवनसिंह अलाउद्दीन ख़िलजी का चित्तोड़ पर आक्रमण १० भीमासिंह होने पर वि० सं० १३६० में परलोक ११ जयसिंह सिधारा और चित्तोड़ पर मुसलमानों का अधिकार हुआ। १२ लखमणसीसिंह | वि. सं. १३६० अरिसिंह १३ अजयसिंह [नोट: इसके वंशजों ने मेवाड़ से बाहर जाकर दक्षिण में राज्य-स्थापना की।] ४३ हमीरसह वि० सं० १३८२ (?)-१४२१ (?) | मुसलमानों से चित्तोड़ लिया ४४ क्षेत्रसिंह ( खेता ) वि० सं० १४२१ (?)-१४३६ ४५ लक्षसिंह ( लाखा ) वि० सं० १४३६-१४७८ (?) ४६ मोकल वि० सं० १४७८ (?)-१४९० ४७ कुंभकर्ण ( कुंभा ) वि० सं० १४९०-१५२५ मेवाड़ का स्वामी क्षेमकर्ण ( खींवा ) प्रतापगढ़वालों का पूर्वज