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राजपूताने का इतिहास (मेवाड़ राज्य का इतिहास व वीर गाथाएँ)

History of Rajputana & Mewar by Gaurishankar Ojha

महामहोपाध्याय पं. गौरीशंकर हीराचन्द ओझा द्वारा

DevanagariHindipublished534 पृष्ठ

३६६ प्रतापगढ़ राज्य का इतिहास ३२ विक्रमसिंह ३३ रणसिंह ( कर्णसिंह )। | मेवाड़ की रावल शाखा सीसोदे की राणा शाखा ३४ क्षेमसिंह १ माहप २ राहप ३५ सामंतसिंह ३६ कुमारसिंह ३ नरपति [नोट: पहले मेवाड़ का स्वामी हुआ फिर वागड़ की तरफ जाकर डूंगरपुर-बांसवाड़ा राज्य की स्थापना की।] ३७ मथनसिंह ४ दिनकरण ३८ पद्मसिंह ५ जसकरण ३९ जैत्रसिंह वि० सं० १२७०-१३०६ ६ नागपाल ४० तेजसिंह वि० सं० १३१७-२४ ७ पूर्णपाल ४१ समरसिंह वि० सं० १३३०-५८ ८ पृथ्वीमल्ल ४२ रत्नसिंह वि० सं० १३५६-६० ९ भुवनसिंह अलाउद्दीन ख़िलजी का चित्तोड़ पर आक्रमण १० भीमासिंह होने पर वि० सं० १३६० में परलोक ११ जयसिंह सिधारा और चित्तोड़ पर मुसलमानों का अधिकार हुआ। १२ लखमणसीसिंह | वि. सं. १३६० अरिसिंह १३ अजयसिंह [नोट: इसके वंशजों ने मेवाड़ से बाहर जाकर दक्षिण में राज्य-स्थापना की।] ४३ हमीरसह वि० सं० १३८२ (?)-१४२१ (?) | मुसलमानों से चित्तोड़ लिया ४४ क्षेत्रसिंह ( खेता ) वि० सं० १४२१ (?)-१४३६ ४५ लक्षसिंह ( लाखा ) वि० सं० १४३६-१४७८ (?) ४६ मोकल वि० सं० १४७८ (?)-१४९० ४७ कुंभकर्ण ( कुंभा ) वि० सं० १४९०-१५२५ मेवाड़ का स्वामी क्षेमकर्ण ( खींवा ) प्रतापगढ़वालों का पूर्वज

परिशिष्ट संख्या २ महारावत क्षेमकर्ण से वर्तमान समय तक प्रतापगढ़ के राजाओं की वंशावली नाम | ख्यातों में उल्लिखित राज्याभिषेक का संवत् (बड़वा की ख्यात से) | ख्यातों में उल्लिखित राज्याभिषेक का संवत् (अन्य ख्यातों आदि से) | शिलालेखों आदि से ज्ञात संवत् | ग्रंथकर्ता के मतानुसार राज्याभिषेक का संवत् महारावत क्षेमकर्ण | ... | ... | ... | ... ,, सूरजमल | १५३० | १५३० | ... | १५३० के आसपास ,, बाघसिंह | १५८७ | १५८४ | ... | १५८७ ,, रायसिंह | १५९२ | १५९१ | ... | १५९२ ,, विक्रमसिंह (बीका) | १६०६ | १६०६ | ... | १६०६ ,, तेजसिंह | १६२० | १६३३ | १६२१, १६३५ | १६२० ,, भानुसिंह (भाना) | १६४८ | १६५० | १६५१, १६५२ | १६५० ,, सिंहा | १६६० | १६६० | १६७६, १६८४ | १६५४ ,, जसवन्तसिंह | १६८५ | १६८५ | ... | १६८५ ,, हरिसिंह | १६९० | १६९० | १६९६-१७२४ | १६८५ ,, प्रतापसिंह | १७३० | १७३० | १७३१-१७६४ | १७३० ,, पृथ्वीसिंह | १७६४ | १७६४ | १७६५-१७७५ | १७६५ ,, संग्रामसिंह | १७७६ | १७७५ | १७७६ | १७७५ ,, उम्मेदसिंह | १७७७ | १७७६ | १७७७ | १७७६ ,, गोपालसिंह | १७७६ | १७७६ | १७७८-१८११ | १७७८ ,, सालिमसिंह | १८१४ | १८१४ | १८१३-१८६६ | १८१३ ,, सामन्तसिंह | १८३१ | १८३१ | १८३८-१८४२ | १८३१ ,, दलपतसिंह | १६०० | १६०० | ... | १६०० ,, उदयसिंह | १६२० | १६२० | ... | १६२० ,, रघुनाथसिंह | १६४६ | १६४६ | ... | १६४६ ,, रामसिंहजी (विद्यमान) | ... | ... | ... | १६८५

परिशिष्ट संख्या ३ प्रतापगढ़ राज्य के इतिहास का कालक्रम ++++++++ महारावत क्षेमकर्ण वि० सं० ई० स० ( १४६४ )¹ ( १४३७ ) क्षेमकर्ण का सादड़ी पर अधिकार करना । ( १५३० ) ( १४७३ ) क्षेमकर्ण की मृत्यु । महारावत सूरजमल ( १५३० ) ( १४७३ ) सूरजमल की गद्दीनशीनी । १५६१ १५०४ सूरजमल के संबंध में चारणी की भविष्यवाणी । ( १५६३ ) ( १५०६ ) मालवा के सुलतान नासिरशाह के पास सहायतार्थ जाना । ( १५६४ ) ( १५०७ ) सूरजमल और सारंगदेव का मालवा की सेना के साथ जाकर महाराणा रायमल से युद्ध करना । ( १५६५ ) ( १५०८ ) सूरजमल का मेवाड़ छोड़ कांठल में आबाद होना । ( १५८७ ) ( १५३० ) सूरजमल की मृत्यु । महारावत वाघसिंह ( १५८७ ) ( १५३० ) वाघसिंह की गद्दीनशीनी । १५६२ १५३५ बहादुरशाह की चित्तोड़ की चढ़ाई के अवसर पर वाघसिंह का मारा जाना । ( १ ) ऊपर कोष्ठकों में दिये हुए संवत् अनुमानिक हैं, निश्चित नहीं ।

परिशिष्ट ३६६ महारावत रायसिंह वि० सं० ई० स० १५६२ १५३५ रायसिंह की गद्दीनशीनी । ( १५६३ ) ( १५३६ ) उदयसिंह को लेकर धाय पन्ना का देवलिया जाना । ( १६०६ ) ( १५५२ ) रायसिंह का देहांत । महारावत विक्रमसिंह (वीका) ( १६०६ ) ( १५५२ ) विक्रमसिंह की गद्दीनशीनी । ( १६१० ) ( १५५३ ) विक्रमसिंह का मेवाड़ का परित्याग करना । १६१३ १५५७ विक्रमसिंह का कुंवर तेजसिंह को महाराणा उदयसिंह के साथ हाजीखां की सहायतार्थ भेजना । ( १६१७ ) ( १५६० ) विक्रमसिंह का देवलिया को राजधानी बनाना । ( १६१९ ) ( १५६२ ) विक्रमसिंह का बांसवाड़ा के स्वामी प्रतापसिंह की सहायतार्थ महारावल आसकर्ण (डूंगरपुर) से लड़ना । ( १६२० ) ( १५६३ ) विक्रमसिंह का देहांत । महारावत तेजसिंह १६२० ( १५६३ ) तेजसिंह की गद्दीनशीनी । १६२१ १५६४ दमाखेड़ी गांव का दानपत्र । १६३३ १५७६ हल्दीघाटी के युद्ध में महारावत का कांधल को महाराणा प्रतापसिंह (प्रथम) की सहायतार्थ भेजना । १६५० १५९३ तेजसिंह का देहांत ।

४०० प्रतापगढ़ राज्य का इतिहास महारावत भानुसिंह (भाना) वि० सं० ई० स० १६५० १५९३ भानुसिंह की गद्दीनशीनी । १६५१ १५९४ सेमली गांव का ताम्रपत्र । १६५२ १५९५ अमलावद गांव का ताम्रपत्र । १६५४ १५९७ भानुसिंह का चीताखेड़े के पास शक्तावत जोधसिंह से लड़कर मारा जाना । महारावत सिंहा १६५४ १५९७ सिंहा की गद्दीनशीनी । १६७२ १६१५ जहांगीर का महाराणा अमरसिंह (प्रथम) के कुंवर कर्णसिंह को वसाड़ और अरगोद का फ़रमान देना । (१६८३) (१६२६) महावतखां का देवलिया में जाकर रहना । १६८४ १६२७ गयासपुर की बावड़ी की प्रशस्ति । (१६८५) (१६२८) सिंहा का देहांत । महारावत जसवन्तसिंह (१६८५) (१६२८) जसवन्तसिंह की गद्दीनशीनी । १६८५ १६२८ महाराणा से छेड़-छाड़ न करने के लिए शाहजहां का जांनिसारखां के नाम फ़रमान भेजना । (१६८५) (१६२८) महारावत का कुंवर महासिंह-सहित महाराणा जगतसिंह (प्रथम) की सेना से लड़कर मारा जाना।

परिशिष्ट ४०१ महारावत हरिसिंह वि० सं० ई० स० (१६८५) (१६२८) हरिसिंह की गद्दीनशीनी । (१६८५) (१६२८) जोधसिंह (धमोतर) का हरिसिंह को दिल्ली ले जाना । (१६८५) (१६२८) महाराणा जगतसिंह (प्रथम) का सेना भेज देवलिया बरबाद कर वहां अधिकार करना । (१६६०) (१६३३) बादशाह का फ़ौज भेज देवलिया पर महारावत का अधिकार कराना । (१६६०) (१६३३) महाराणा का धरियावद का परगना खालसा करना । १६६६ १६४२ मचलाना गांव का ताम्रपत्र । १७०१ १६४४ महारावत का टिकरा गांव दान करना । १७०५ १६४८ देवलिया के गोवर्द्धननाथ के मंदिर की प्रशस्ति और कीटखेड़ी गांव का ताम्रपत्र । १७०५ १६४८ महारावत की माता का गोवर्द्धननाथ के मन्दिर की प्रतिष्ठा के समय तुलादान करना । १७०५ १६४८ शाहजहां का महारावत को खिलअत आदि देना । १७०६ १६५२ शाहजहां का महारावत को बुलाना । १७०६ १६५३ महारावत को कोटड़ी का परगना मिलना । १७१० १६५४ हरिसिंह की शाहज़ादे मुराद के साथ नियुक्ति । १७११ १६५४ शाहज़ादे मुरादबख़्श के पास उपस्थित होना । १७११ १६५४ शाहज़ादे मुराद का महारावत को उज्जैन से हटाकर अहमदाबाद में नियत करना । १७१४ १६५७ शाहज़ादे दाराशिकोह का निशान भेजना । १७१४ १६५७ शाहज़ादे मुरादबख़्श का निशान भेजना । १७१५ १६५८ शाहज़ादे दाराशिकोह का मुरादबख़्श को बंदी करने के लिए निशान भेजना । ५१

: ४०२ प्रतापगढ़ राज्य का इतिहास वि० सं० ई० स० १७१५ १६५८ मुरादबख्श का महारावत को परगना सुखेरी देने का निशान और खिलअत भेजना । १७१५ १६५८ बादशाह औरंगज़ेब का महाराणा राजसिंह (प्रथम) के नाम बसाड़, गयासपुर आदि का फ़रमान करना । १७१५ १६५६ दाराशिकोह का हरिसिंह को अपने पास उपस्थित होने के लिए निशान भेजना । १७१६ १६५६ महाराणा राजसिंह (प्रथम) का देवलिया पर सेना भेजना । १७१६ १६५६ महारावत का बादशाह औरंगज़ेब के पास जाना । १७१६ १६५६ महारावत की माता का अपने पौत्र प्रतापसिंह को महाराणा के पास भेजना । १७१६ १६५६ बसाड़ के दौरे के समय हरिसिंह का महाराणा राजसिंह (प्रथम) की सेवा में उपस्थित होना । (१७१८) (१६६१) महारावत का बादशाह के पास जाकर गयासपुर तथा बसाड़ के परगने पुनः प्राप्त करना । १७१६ १६६२ कुंवर प्रतापसिंह तथा अमरसिंह को शाही सेवा में भिजवाने के संबंध में अर्ज़ी भेजना । १७२१ १६६४ बादशाह का महारावत को मालवे में रहने की आज्ञा देना । १७३० १६७३ महारावत का देहांत । महारावत प्रतापसिंह १७३० १६७३ महारावत की गद्दीनशीनी । १७३१ १६७४ बादशाह औरंगज़ेब का महारावत को मनसब देना ।

परिशिष्ट ४०३ वि० सं० ई० स० १७३१ १६७५ भोगीदास की बावड़ी का शिलालेख । ( १७३२) ( १६७५ ) महाराणा और महारावत की तक़रार की जांच के लिए शेख़ इनायतुल्ला का भेजा जाना । १७३३ १६७७ पाटण्ये गांव का संस्कृत दानपत्र । १७३६ १६७६ बादशाह का मेवाड़ की चढ़ाई के समय महारावत को मंदसोर में हाज़िर होने के लिए फ़रमान भेजना। १७३७ १६८० शाहज़ादे मुअज्जम का महारावत को देवारी के मुक़ाम पर बुलवाना । १७३८ १६८१ शाहज़ादे आज़म का महारावत को अपने पास उपस्थित होने के लिए लिखना । १७५३ १६६६ महाराजा अजीतसिंह का प्रतापगढ़ में विवाह होना। १७५५ १६६६ महारावत का प्रतापगढ़ का क़स्बा बसाना । ( १७५६) ( १६६६) महाराणा अमरसिंह (द्वितीय) का महारावत से छेड़छाड़ करना । १७६४ १७०८ बादशाह बहादुरशाह का महारावत को बुलाना । १७६५ १७०८ महाराजा अजीतसिंह और सवाई जयसिंह का उदयपुर जाते समय देवलिया में ठहरना । ( १७६५) ( १७०८ ) महारावत का देहान्त । महारावत पृथ्वीसिंह ( १७६५ ) ( १७०८ ) महारावत की गद्दीनशीनी । १७६६ १७०६ महाराजा अजीतसिंह का महारावत की पुत्री से विवाह होना । १७६६ १७०६ बादशाह बहादुरशाह के पास से बसाइ परगने का फ़रमान आनां ।

४०४ प्रतापगढ़ राज्य का इतिहास

वि० सं०   ई० स०
१७६८   १७११   महारावत के मनसब में वृद्धि होना ।
१७६६   १७१२   वज़ीर आसफ़ुद्दौला का वसाड़ के परगने की आय
महारावत को देने के लिए आज्ञापत्र भेजना ।
१७७१   १७१४   बादशाह होने पर फ़र्रुख़सियर का महारावत के
नाम फ़रमान भेजना ।
( १७७१ )   ( १७१४ ) महारावत को 'रावत राव' का खिताब मिलना ।
१७७१   १७१४   महारावत का शाही इलाक़े में उत्पात करना ।
१७७३   १७१६   महारावत का कुंवर पहाड़सिंह को उदयपुर के
महाराणा संग्रामसिंह (द्वितीय) की सेवा में भेजना ।
१७७३   १७१६   सवाई जयसिंह और राव बुधसिंह (बूंदी) का
महारावत के विरुद्ध शिकायत करना ।
१७७३   १७१६   महारावत पर लगाये गये अभियोगों की जांच के
लिए बादशाह का कुतुबुलमुल्क को आज्ञा देना ।
१७७४   १७१७   महाराणा संग्रामसिंह के मंत्री बिहारीदास का
रामपुरा से लौटते समय देवलिया में ठहरना ।
१७७४   १७१८   महारावत का वर्ष भर में ४४ दिन तेल निकालने का
निषेध करना ।
१७७४   १७१८   देवलिया के बड़े जैन मंदिर की प्रशस्ति ।
१७७४   १७१८   महारावत का पर्यूषणों, अष्टमी, चतुर्दशी और
रविवार को शराब की भट्टी बंद रखने की आज्ञा
देना ।
( १७७५ )   ( १७१८ ) कुंवर पहाड़सिंह की मृत्यु ।
( १७७५ )   ( १७१८ ) महारावत का देहांत

परिशिष्ट ४०५ महारावत संग्रामसिंह ( रामसिंह ) वि० सं० ई० स० ( १७७५ ) ( १७१८ ) महारावत की गद्दीनशीनी । ( १७७६ ) ( १७१६ ) महारावत का देहांत । ——— महारावत उम्मेदसिंह ( १७७६ ) ( १७१६ ) महारावत की गद्दीनशीनी । ( १७७८ ) ( १७२१ ) महारावत का देहांत । ——— महारावत गोपालसिंह ( १७७८ ) ( १७२१ ) महारावत की गद्दीनशीनी । १७७८ १७२१ महारावत का उदयपुर जाना । ( १७७६ ) ( १७२२ ) महारावत को धरियावद का परगना मिलना । १७८७ १७३० महारावत का डूंगरपुर से महाराणा और पेशवा की सेना का घेरा उठवाना । १७६१ १७३४ परामर्श के लिए मरहटों की सेना के देवलिया के समीप एकत्रित न होने के लिए महाराणा जगतसिंह- ( दूसरा ) का बिहारीदास के नाम पत्र भेजना । १७६२ १७३६ पेशवा बाजीराव के राजपूताने में आने पर महा- रावत का उसके साथ रहना । १७६७ १७४० सवाई जयसिंह के जोधपुर घेरने पर महारावत का महाराणा के शामिल होना । १८१३ १७५६ महारावत का देहांत ।

४०६ प्रतापगढ़ राज्य का इतिहास महारावत सालिमसिंह वि० सं० ई० स० १८१३ १७५६ महारावत की गद्दीनशीनी । (१८१४) (१७५७) महारावत का दिल्ली जाकर बादशाह से राज्यचिन्ह, निशान एवं नक़्क़ारा रखने के सम्मान के साथ सालिमशाही सिक्का बनाने की आज्ञा प्राप्त करना । १८१८ १७६१ तुकोजी होल्कर का प्रतापगढ़ पर घेरा डालना । १८२० १७६३ मल्हारराव होल्कर का प्रतापगढ़ से धन वसूल करना । १८२५ १७६८ महारावत का महाराणा अरिसिंह की सहायतार्थ जाना । १८३१ १७७४ महारावत का देहांत । महारावत सामन्तसिंह १८३१ १७७४ महारावत की गद्दीनशीनी । १८४० १७८४ महाराणा भीमसिंह के बांसवाड़ा की तरफ़ बढ़ने का समाचार पाकर महारावत का मोतमिद भेज धरियावद का निरदावा करना । १८६१ १८०४ अंग्रेज़ सरकार के साथ संधि होना । १८६५ १८०८ महारावत के पौत्र केसरीसिंह और दलपतसिंह का जन्म । १८७५ १८१८ अंग्रेज़ सरकार के साथ पुनः संधि होना । १८७७ १८२० महारावत के पौत्र दलपतसिंह को डूंगरपुर के महारावत जसवन्तसिंह (दूसरा) का गोद लेने के लिए वहां ले जाना । १८८० १८२३ कुंवर दीपसिंह का बंदी होना !

परिशिष्ट : ४०७ वि० सं० ई० स० १८८० १८२३ महारावत का अंग्रेज़ सरकार से सेना रखने के एवज़ में नक़द रक़म देने का इक़रार करना। (१८८०) (१८२३) भंवर केसरीसिंह को राजकार्य सौंपना। १८८३ १८२६ कुंवर दीपसिंह की मृत्यु। १८८६ १८३३ महारावत की पौत्री प्रतापकुंवरी का विवाह। १८६१ १८३४ केसरीसिंह की मृत्यु। (१८६१) (१८३४) महारावत का दलपतसिंह को राजकार्य सौंपना। १९०० १८४४ महारावत का देहांत। महारावत दलपतसिंह १९०० १८४४ महारावत की गद्दीनशीनी। (१९००) (१८४४) अंग्रेज़ सरकार की तरफ़ से महारावत को गद्दीनशीनी की ख़िलअत मिलना। १९०३ १८४६ डूंगरपुर की गद्दी पर साबली के ठाकुर जसवंतसिंह के पुत्र उदयसिंह को नियत करना। १९०५ १८४६ कुंवर उदयसिंह का जन्म। १९०६ १८५२ महारावत का डूंगरपुर का शासनाधिकार छोड़ना। १९१४ १८५७ सिपाही-विद्रोह के समय महारावत का नीमच में सेना भेजना और क़ासिमखां विलायती आदि विद्रोहियों का महारावत की सेना-द्वारा मारा जाना। १९१८ १८६२ महारावत को गोदनशीनी की सनद मिलना। १९२० १८६४ महारावत का परलोकवास।

४०८ प्रतापगढ़ राज्य का इतिहास महारावत उदयसिंह वि० सं० ई० स० १६२० १८६४ महारावत की गद्दीनशीनी। १६२२ १८६५ महारावत के कुंवर हमीरसिंह का जन्म। १६२२ १८६५ अंग्रेज़ सरकार की तरफ़ से गद्दीनशीनी की खिलअत मिलना। १६२२ १८६५ प्रतापगढ़ राज्य की सीमा में होकर रेलवे लाइन लाने के विषय में अंग्रेज़ सरकार से बातचीत होना। १६२३ १८६६ महारावत का आगरे जाकर लॉर्ड लॉरेंस से मुलाक़ात करना। १६२४ १८६७ महारावत का प्रतापगढ़ को राजधानी बनाना। १६२४ १८६७ अंग्रेज़ सरकार की तरफ़ से पंद्रह तोपों की सलामी नियत होना। १६२५ १८६८ अकाल के समय लोगों की सहायता करना। १६२५ १८६८ अपराधियों के लेन-देन के संबंध में अंग्रेज़ सरकार के साथ इक़रारनामा होना। १६३२ १८७५ महारावत का लॉर्ड नॉर्थब्रुक की मुलाक़ात के लिए नीमच जाना। १६३३ १८७७ दिल्ली दरबार के समय महारावत को झंडा मिलना। १६३७ १८८१ प्रतापगढ़ में प्रथम बार मनुष्य-गणना होना। १६३६ १८८३ महारावत का नीमच जाकर इंदौर के तत्कालीन महाराजा तुकोजीराव होल्कर से मुलाक़ात करना। १६४३ १८८७ महारावत के कुंवर अर्जुनसिंह का जन्म। १६४४ १८८७ महाराणी विक्टोरिया की स्वर्ण जयंती पर महारावत का प्रतापगढ़ में पुल बनवाना। १६४४ १८८७ महारावत का नीमच जाकर शाहज़ादे ड्यूक ऑव् कनॉट से मुलाक़ात करना।

परिशिष्ट ४०६

वि० सं० ई० स०
१६४६ १८६० महारावत का देहांत।
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महारावत रघुनाथसिंह
१६४६ १८६० महारावत की गद्दीनशीनी।
१६४७ १८६० महारावत के ज्येष्ठ कुंवर प्रतापसिंह का देहांत।
१६४७ १८६१ अंग्रेज़ सरकार की तरफ़ से गद्दीनशीनी की खिलअत
और खरीता लेकर कर्नल ट्रेवर का प्रतापगढ़ जाना।
१६५१ १८६४ प्रतापगढ़ से मंदसोर जानेवाले मार्ग में महारावत का
पक्की सड़क बनवाना।
१६५१ १८६४ महारावत का प्रथम वर्ग के सरदारों को मुक़द्दमे
सुनने का अधिकार देना।
१६५२ १८६५ महारावत का प्रतापगढ़ में अस्पताल बनवाना।
१६५४ १८६७ महारावत की ज्येष्ठ राजकुमारी वल्लभकुंवरी का
विवाह बीकानेर के वर्तमान महाराजा सर गंगा-
सिंहजी से होना।
१६५६ १८६६ प्रतापगढ़ राज्य में भयङ्कर अकाल होना।
१६५७ १९०० महारावत के छोटे महाराजकुमार गोवर्द्धनसिंह का
जन्म।
१६५८ १९०१ महाराजकुमार गोवर्द्धनसिंह को अरणोद मिलना और
उसकी उपाधि "महाराज" होना।
१६५९ १९०३ महाराजकुमार मानसिंह का सीकर में विवाह होना।
१६६० १९०४ सालिमशाही सिक्के के स्थान में कल्दार का चलन
होना।
१६६१ १९०४ अंग्रेज़ सरकार के खिराज के कल्दार रुपये नियत
करना।
५२

४१० प्रतापगढ़ राज्य का इतिहास वि० सं० ई० स० १६६२ १९०५ महारावत का महाराजकुमार को राज्याधिकार सौंपना। १६६५ १९०८ महारावत के भंवर रामसिंह का जन्म। १६६५ १९०८ महाराजकुमार का काश्मीर जाना। १६६६ १९०६ महारावत की दूसरी राजकुमारी का विवाह सैलाना के राजकुमार दिलीपसिंह से होना। १६६७ १९१० महाराजकुमार का टेहरी में दूसरा विवाह होना। १६६८ १९११ महाराजकुमार मानसिंह की राजकुमारी मोहनकुंवरी का जन्म। १६६८ १९११ दिल्ली दरबार में महाराजकुमार का जाना और महारावत को के० सी० आई० ई० का खिताब मिलना। १६६६ १९१२ महारावत का अजमेर जाकर लॉर्ड हार्डिंज से मुलाक़ात करना। १६६६ १९१२ महाराजा का ध्रांगधरा में तृतीय विवाह होना। १६७१ १९१४ महारावत के शासन की रौप्य जयन्ती होना। १६७५ १९१८ महाराजकुमार मानसिंह का परलोकवास। १६७८ १९२१ महारावत का पारसी धनजी शाह को दीवान बनाना। १६८१ १९२४ महारावत के भंवर रामसिंह का सीकर में विवाह होना १६८१ १९२४ बीकानेर और ग्वालियर के महाराजाओं का प्रताप- गढ़ जाना। १६८१ १९२५ महारावत की प्रपौत्री देवेन्द्रकुंवरी का जन्म। १६८५ १९२६ महारावत का परलोकवास।

परिशिष्ट ४११ महारावत सर रामसिंहजी वि० सं० ई० स० १९८५ १९२६ महारावतजी की गद्दीनशीनी १९८६ १९२६ राजपूताने कें एजेंट गर्वनर जनरल का प्रतापगढ़ जाकर गद्दीनशीनी का खरीता और ख़िलअत देना । १९८६ १९२६ महारावत का एफ़ू० सी० केवेन्टरी को दीवान नियत करना । १९८६ १९२६ महारावत की बहिन का सीतामऊ के ज्येष्ठ महाराज- कुमार के साथ विवाह होना । १९८६ १९३२ महारावत का डुमरांव में दूसरा विवाह होना । १९६० १९३३ महाराजकुंवरी इंद्रकुंवरी का जन्म । १९६१ १९३४ महारावत का ध्रांगधरा में तीसरा विवाह होना । १९६१ १९३५ जैन दिगम्बर समाज-द्वारा महारावत का अभिनंदन होना । १९६४ १९३७ अंगरेज़ सरकार का खिराज में कमी करना । १९६४ १९३७ महाराजकुमारी उर्मिलाकुंवरी का जन्म । १९६४ १९३८ महारावत को कें० सी० एसू० आई० का खिताब मिलना । १९६४ १९३८ महाराजकुमारी यशवंतकुंवरी का जन्म । १९६६ १९३६ महाराजकुमारी कुसुमकुंवरी और कुमुदकुंवरी का जन्म । १९६६ १९४० महाराजकुमार का जन्म

परिशिष्ट संख्या ४ प्रतापगढ़ राज्य के इतिहास के प्रणयन में जिन-जिन पुस्तकों से सहायता ली गई उनकी सूची । संस्कृत और प्राकृत संस्कृत- अमरकाव्य । कुंडप्रदीप ( सोमजी भट्ट ) । गोपालार्चनचन्द्रिका । नाममाहात्म्य ( रामकृष्ण ) । प्रतापप्रशस्ति ( कवि कल्याण ) । प्राचीन लेखमाला ( पं० दुर्गाप्रसाद ) । बालभारत ( कवि राजशेखर ) । मयूरेशमन्दार ( कृष्णदास वैष्णव ) । महाभारत ( वेद व्यास ) । राजप्रशस्ति महाकाव्य ( रणछोड भट्ट ) । विष्णुसहस्रनाम की टीका ( कवि जयदेव ) । शास्त्रदीपिका । सत्यरूपक ( वृन्द कवि ) । संगीतरत्नावली । हरिभूषण महाकाव्य ( कवि गंगाराम ) । हरिविजयनाटक ( कवि जयदेव ) । हरिसारस्वत ( महारावत हरिसिंह ) । हृदयप्रकाश ( हृदयेश ) । हेमाद्रिप्रयोग ( हेमाद्रि ) ।

परिशिष्ट '४१३ प्राकृत— प्रभावकचरित ( चन्द्रप्रभसूरि ) । विद्धशालभंजिका ( कवि राजशेखर ) । डिंगल, हिन्दी, गुजराती, उर्दू, फ़ारसी आदि भाषाओं के ग्रंथ डिंगल— भीमविलास ( कवि कृष्ण अहाड़ा ) । रायमल रासा । वंशभास्कर ( मिश्रण सूर्यमल्ल ) । हिन्दी— उदयपुर राज्य का इतिहास ( गौरीशंकर हीराचंद ओझा ) । उदयपुर राज्य के बड़वा की ख्यात (बड़वा देवीदान के यहां से प्राप्त) । ऐतिहासिक बातों का संग्रह ( कविराजा बांकीदास ) । काव्यकुसुम ( पं० जगन्नाथ शास्त्री ) । चतुरकुलचरित्र ( ठाकुर चतुरसिंह ) । जहांगीरनामा ( मुंशी देवीप्रसाद ) । जोधपुर राज्य की ख्यात । जोधपुर के राजाओं, रानियों और कुंवरों की नामावली ( मुंशी देवीप्रसाद ) । नागरी प्रचारिणी पत्रिका, नवीन संस्करण, काशी नागरी प्रचारिणी सभा-द्वारा प्रकाशित । प्रतापगढ़ राज्य की ख्यात । प्रतापगढ़ राज्य की एक पुरानी ख्यात । प्रतापगढ़ राज्य के बड़वे की ख्यात । महाराणा उदयसिंहजी का जीवन-चरित्र ( मुंशी देवीप्रसाद ) । महाराणा रत्नसिंह और विक्रमादित्य के जीवन-चरित्र ( मुंशी देवीप्रसाद ) ।

४१४ प्रतापगढ़ राज्य का इतिहास मुंहणोत नैणसी की ख्यात । राजपूताने का इतिहास ( गौरीशंकर हीराचंद ओझा ) रावत प्रतापसिंह ने मोहोकमसिंह हरिसिंघोत देवगढ़ रा धणी री वार्ता ( महाराज बहादुरसिंह ) । वीरविनोद ( महामहोपाध्याय कविराजा श्यामलदास ) । शाहजहांनामा ( मुंशी देवीप्रसाद ) । हरिपिंगल ( जोग कवि ) । गुजराती— पुरातत्व ( त्रैमासिक ) । मिरात-इ-सिकन्दरी—गुजराती अनुवाद ( आत्माराम मोतीराम दीवानजी ) । हिन्द राजस्थान ( अमृतलाल गोवर्द्धनदास शाह तथा काशीराम उत्तमराम पंड्या ) । फ़ारसी— अख़बारात-इ-दरबार-इ-मुअल्ला । औरंगज़ेबनामा । तारीखे फ़िरिश्ता ( मुहम्मद क़ासिम फ़िरिश्ता ) । बादशाहनामा ( अब्दुलहमीद लाहौरी ) मिरात-इ-सिकन्दरी ( सिकन्दर ) । वक़ाये राजपूताना ( मुंशी ज्वालासहाय ) ।

परिशिष्ट ४१५ अंग्रेज़ी ग्रन्थ Aitchison, C. U.—Treaties, Engagements and Sanads. Annual Reports of the Rajputana Museum, Ajmer. Archaeological Survey of India, Annual Reports. Baniprasad, Dr.—History of Jahangir. Bhavnagar Inscriptions. Briggs, John—History of the Rise of the Mohammadan Power in India (Translation of Tarikh-i-Ferishta of Mahomed Kasim Ferishta). Duff, C. Mabel—Chronology of India. Epigraphia Indica. Erskine, K. D.—Gazetteer of the Partabgarh State. Heber, Bishop—Narrative of a journey through the Upper Provinces of India. Malcom, Sir John—Report on the Province of Malwa and Adjoining Districts. Malleson, G. B.—Historical Sketches of the Native States of India. Memorandum on the Indian States—1938. Selections from the Peshwas' Daftar. Showers, C. L.—A Missing Chapter in the Indian Mutiny. Souvenir History of the Sailana State. Tod, Col. James—Annals and Antiquities of Rajasthan. Vedivelu, A.—The Ruling Chiefs, Nobles and Zamindars of India. Yate, Captain C. E.—Gazetteer of Partabgarh.