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राजपूताने का इतिहास (मेवाड़ राज्य का इतिहास व वीर गाथाएँ)

राजपूताने का इतिहास (मेवाड़ राज्य का इतिहास व वीर गाथाएँ)

History of Rajputana & Mewar by Gaurishankar Ojha

महामहोपाध्याय पं. गौरीशंकर हीराचन्द ओझा द्वारा

DevanagariHindipublished534 पृष्ठ

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परिशिष्ट ४०१ महारावत हरिसिंह वि० सं० ई० स० (१६८५) (१६२८) हरिसिंह की गद्दीनशीनी । (१६८५) (१६२८) जोधसिंह (धमोतर) का हरिसिंह को दिल्ली ले जाना । (१६८५) (१६२८) महाराणा जगतसिंह (प्रथम) का सेना भेज देवलिया बरबाद कर वहां अधिकार करना । (१६६०) (१६३३) बादशाह का फ़ौज भेज देवलिया पर महारावत का अधिकार कराना । (१६६०) (१६३३) महाराणा का धरियावद का परगना खालसा करना । १६६६ १६४२ मचलाना गांव का ताम्रपत्र । १७०१ १६४४ महारावत का टिकरा गांव दान करना । १७०५ १६४८ देवलिया के गोवर्द्धननाथ के मंदिर की प्रशस्ति और कीटखेड़ी गांव का ताम्रपत्र । १७०५ १६४८ महारावत की माता का गोवर्द्धननाथ के मन्दिर की प्रतिष्ठा के समय तुलादान करना । १७०५ १६४८ शाहजहां का महारावत को खिलअत आदि देना । १७०६ १६५२ शाहजहां का महारावत को बुलाना । १७०६ १६५३ महारावत को कोटड़ी का परगना मिलना । १७१० १६५४ हरिसिंह की शाहज़ादे मुराद के साथ नियुक्ति । १७११ १६५४ शाहज़ादे मुरादबख़्श के पास उपस्थित होना । १७११ १६५४ शाहज़ादे मुराद का महारावत को उज्जैन से हटाकर अहमदाबाद में नियत करना । १७१४ १६५७ शाहज़ादे दाराशिकोह का निशान भेजना । १७१४ १६५७ शाहज़ादे मुरादबख़्श का निशान भेजना । १७१५ १६५८ शाहज़ादे दाराशिकोह का मुरादबख़्श को बंदी करने के लिए निशान भेजना । ५१