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राजपूताने का इतिहास (मेवाड़ राज्य का इतिहास व वीर गाथाएँ)

राजपूताने का इतिहास (मेवाड़ राज्य का इतिहास व वीर गाथाएँ)

History of Rajputana & Mewar by Gaurishankar Ojha

महामहोपाध्याय पं. गौरीशंकर हीराचन्द ओझा द्वारा

DevanagariHindipublished534 पृष्ठ

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४०० प्रतापगढ़ राज्य का इतिहास महारावत भानुसिंह (भाना) वि० सं० ई० स० १६५० १५९३ भानुसिंह की गद्दीनशीनी । १६५१ १५९४ सेमली गांव का ताम्रपत्र । १६५२ १५९५ अमलावद गांव का ताम्रपत्र । १६५४ १५९७ भानुसिंह का चीताखेड़े के पास शक्तावत जोधसिंह से लड़कर मारा जाना । महारावत सिंहा १६५४ १५९७ सिंहा की गद्दीनशीनी । १६७२ १६१५ जहांगीर का महाराणा अमरसिंह (प्रथम) के कुंवर कर्णसिंह को वसाड़ और अरगोद का फ़रमान देना । (१६८३) (१६२६) महावतखां का देवलिया में जाकर रहना । १६८४ १६२७ गयासपुर की बावड़ी की प्रशस्ति । (१६८५) (१६२८) सिंहा का देहांत । महारावत जसवन्तसिंह (१६८५) (१६२८) जसवन्तसिंह की गद्दीनशीनी । १६८५ १६२८ महाराणा से छेड़-छाड़ न करने के लिए शाहजहां का जांनिसारखां के नाम फ़रमान भेजना । (१६८५) (१६२८) महारावत का कुंवर महासिंह-सहित महाराणा जगतसिंह (प्रथम) की सेना से लड़कर मारा जाना।