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राजपूताने का इतिहास (मेवाड़ राज्य का इतिहास व वीर गाथाएँ)

राजपूताने का इतिहास (मेवाड़ राज्य का इतिहास व वीर गाथाएँ)

History of Rajputana & Mewar by Gaurishankar Ojha

महामहोपाध्याय पं. गौरीशंकर हीराचन्द ओझा द्वारा

DevanagariHindipublished534 पृष्ठ

पृष्ठ 473, कुल 534 में से

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पृष्ठ 473

: ४०२ प्रतापगढ़ राज्य का इतिहास वि० सं० ई० स० १७१५ १६५८ मुरादबख्श का महारावत को परगना सुखेरी देने का निशान और खिलअत भेजना । १७१५ १६५८ बादशाह औरंगज़ेब का महाराणा राजसिंह (प्रथम) के नाम बसाड़, गयासपुर आदि का फ़रमान करना । १७१५ १६५६ दाराशिकोह का हरिसिंह को अपने पास उपस्थित होने के लिए निशान भेजना । १७१६ १६५६ महाराणा राजसिंह (प्रथम) का देवलिया पर सेना भेजना । १७१६ १६५६ महारावत का बादशाह औरंगज़ेब के पास जाना । १७१६ १६५६ महारावत की माता का अपने पौत्र प्रतापसिंह को महाराणा के पास भेजना । १७१६ १६५६ बसाड़ के दौरे के समय हरिसिंह का महाराणा राजसिंह (प्रथम) की सेवा में उपस्थित होना । (१७१८) (१६६१) महारावत का बादशाह के पास जाकर गयासपुर तथा बसाड़ के परगने पुनः प्राप्त करना । १७१६ १६६२ कुंवर प्रतापसिंह तथा अमरसिंह को शाही सेवा में भिजवाने के संबंध में अर्ज़ी भेजना । १७२१ १६६४ बादशाह का महारावत को मालवे में रहने की आज्ञा देना । १७३० १६७३ महारावत का देहांत । महारावत प्रतापसिंह १७३० १६७३ महारावत की गद्दीनशीनी । १७३१ १६७४ बादशाह औरंगज़ेब का महारावत को मनसब देना ।

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