राजपूताने का इतिहास (मेवाड़ राज्य का इतिहास व वीर गाथाएँ)
History of Rajputana & Mewar by Gaurishankar Ojha
महामहोपाध्याय पं. गौरीशंकर हीराचन्द ओझा द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंपरिशिष्ट ४०३ वि० सं० ई० स० १७३१ १६७५ भोगीदास की बावड़ी का शिलालेख । ( १७३२) ( १६७५ ) महाराणा और महारावत की तक़रार की जांच के लिए शेख़ इनायतुल्ला का भेजा जाना । १७३३ १६७७ पाटण्ये गांव का संस्कृत दानपत्र । १७३६ १६७६ बादशाह का मेवाड़ की चढ़ाई के समय महारावत को मंदसोर में हाज़िर होने के लिए फ़रमान भेजना। १७३७ १६८० शाहज़ादे मुअज्जम का महारावत को देवारी के मुक़ाम पर बुलवाना । १७३८ १६८१ शाहज़ादे आज़म का महारावत को अपने पास उपस्थित होने के लिए लिखना । १७५३ १६६६ महाराजा अजीतसिंह का प्रतापगढ़ में विवाह होना। १७५५ १६६६ महारावत का प्रतापगढ़ का क़स्बा बसाना । ( १७५६) ( १६६६) महाराणा अमरसिंह (द्वितीय) का महारावत से छेड़छाड़ करना । १७६४ १७०८ बादशाह बहादुरशाह का महारावत को बुलाना । १७६५ १७०८ महाराजा अजीतसिंह और सवाई जयसिंह का उदयपुर जाते समय देवलिया में ठहरना । ( १७६५) ( १७०८ ) महारावत का देहान्त । महारावत पृथ्वीसिंह ( १७६५ ) ( १७०८ ) महारावत की गद्दीनशीनी । १७६६ १७०६ महाराजा अजीतसिंह का महारावत की पुत्री से विवाह होना । १७६६ १७०६ बादशाह बहादुरशाह के पास से बसाइ परगने का फ़रमान आनां ।