राजपूताने का इतिहास (मेवाड़ राज्य का इतिहास व वीर गाथाएँ)

राजपूताने का इतिहास (मेवाड़ राज्य का इतिहास व वीर गाथाएँ)
History of Rajputana & Mewar by Gaurishankar Ojha
महामहोपाध्याय पं. गौरीशंकर हीराचन्द ओझा द्वारा
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४०४ प्रतापगढ़ राज्य का इतिहास
वि० सं० ई० स०
१७६८ १७११ महारावत के मनसब में वृद्धि होना ।
१७६६ १७१२ वज़ीर आसफ़ुद्दौला का वसाड़ के परगने की आय
महारावत को देने के लिए आज्ञापत्र भेजना ।
१७७१ १७१४ बादशाह होने पर फ़र्रुख़सियर का महारावत के
नाम फ़रमान भेजना ।
( १७७१ ) ( १७१४ ) महारावत को 'रावत राव' का खिताब मिलना ।
१७७१ १७१४ महारावत का शाही इलाक़े में उत्पात करना ।
१७७३ १७१६ महारावत का कुंवर पहाड़सिंह को उदयपुर के
महाराणा संग्रामसिंह (द्वितीय) की सेवा में भेजना ।
१७७३ १७१६ सवाई जयसिंह और राव बुधसिंह (बूंदी) का
महारावत के विरुद्ध शिकायत करना ।
१७७३ १७१६ महारावत पर लगाये गये अभियोगों की जांच के
लिए बादशाह का कुतुबुलमुल्क को आज्ञा देना ।
१७७४ १७१७ महाराणा संग्रामसिंह के मंत्री बिहारीदास का
रामपुरा से लौटते समय देवलिया में ठहरना ।
१७७४ १७१८ महारावत का वर्ष भर में ४४ दिन तेल निकालने का
निषेध करना ।
१७७४ १७१८ देवलिया के बड़े जैन मंदिर की प्रशस्ति ।
१७७४ १७१८ महारावत का पर्यूषणों, अष्टमी, चतुर्दशी और
रविवार को शराब की भट्टी बंद रखने की आज्ञा
देना ।
( १७७५ ) ( १७१८ ) कुंवर पहाड़सिंह की मृत्यु ।
( १७७५ ) ( १७१८ ) महारावत का देहांत